माइक्रो प्लास्टिक प्रदूषण को बढावा दे रहे हैं कॉन्टैक्ट लेंस

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ज्ञान प्रकाश, प्लास्टिक के इस्तेमाल से होने वाले प्रदूषण से सभी वाकिफ हैं लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इस्तेमाल के बाद फेंके जाने वाले कॉन्टैक्ट लेंस विभर के जल निकायों में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को बढा रहे हैं और इस प्रकार से ये मनुष्य की खाद्य समग्री तक भी पहुंच सकते हैं। शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि दूषित जल शोधन केन्द्र में पाये जाने वाले माइक्रोब्स ने प्लास्टिक पॉलीमर्स में बांड को कमजोर करके कॉन्ट्रैक्ट लेंसो के तल को परिवर्तित कर दिया। अनुसंधानकर्ताओं में शामिल भारतीय मूल के शोधकर्ता वरूण केल्कर ने कहा, ‘‘जब प्लास्टिक अपनी कुछ संरचनात्मक क्षमता खोता है तो वह प्राकृतिक रूप से खंडित हो जाता है। इससे प्लास्टिक के सूक्ष्म कण बनते हैं जो आगे जा कर माइक्रोप्लास्टिक के निर्माण का कारण बनते हैं।’’ जलीय जीव-जंतु माइक्रोप्लास्टिक को भोजन समझने की भूल कर इन्हें खा लेते है और चूकि प्लास्टिक को पचाया नहीं जा सकता तो यह जलीय जीव-जंतुओं की पाचन शक्ति को खराब करते हैं। ये जन्तु लंबी खाद्य श्रृंखला का एक भाग होते हैं और इस प्रकार से ये मानव खाद्य पदाथरें तक भी पहुंच सकते हैं। अरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के छात्र चार्ली रोल्स्की कहते हैं, ‘‘हमने अमेरिकी बाजारों का रूख किया और कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों पर सव्रेक्षण करके पाया कि 15 से 20 प्रतिशत लोग अपने लेंसों कोंिसक अथवा टॉयलेट में बहा देते हैं।’’ उन्होंने कहा कि बाद में इन लेंसों का क्या होता है इसका आकलन मुश्किल हैं क्योंकि एक तो यह पारदर्शी होते हैं इसलिए अपशिष्ट जल शोधन केन्द्र में इन पर निगाह रखना मुश्किल होता है। इसके अलावा कॉन्टैक्ट लेंस में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक अन्य प्लास्टिक अपशिष्टों से अलग होती है मसलन पॉलीप्रोपेलीन जो कार की बैटरी से ले कर कपड़ों तक में पाई जाती है। इन कारणों से अपशिष्ट जल शोधन केन्द्र में कॉन्टैक्ट लेंसों का प्रसंस्करण चुनौती पूर्ण है।

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