.विकसित देशों के वैज्ञानिक चाहते हैं की भारत के लोग बेड हैबिट्स को छोड़े! -यहां वहां, इधर उधर थूकना, पेशाब कर देना, कूड़ा कहीं पर भी फेंक देना, शिशुओं को टीकाक रण कराने में संवेदनहीन होना -पार्टनर्स फोरम में शिरकत कर रहे विशेषज्ञ से की गई रायशुमारी -दो दिवसीय चौथा अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न -बच्चों और माताओं की मृत्यु दर में कमी लाना तथा किशोरों, बच्चों, नवजात शिशुओं और माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने के उपाय करना

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ज्ञानप्रकाश
नई दिल्ली राजधानी के विज्ञान भवन के कन्वेंशन हाल में पार्टरशिप फॉर मैटरनल, न्यू बोर्न एंड चाइल्ड हेल्थ (पीएमएनसीएच) के सहयोग से चल रहे दो दिन के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शिरकत कर रहे 85 देशों के करीब 1500 प्रतिभागी एक्पर्ट्स का मानना है कि भारतवर्ष एक विकासशील देश है जहां पर निरंतर चहुंओर प्रगति, सुधार और विकास की संभावनाएं है। अनेकता में एकता वाले भारतवासियों का दिल, दिमाग और कठिन परिश्रम, ईमानदारी,तहजीब के लिए जाना जाता है। लेकिन इन विशेषज्ञों का कहना है कि इतना कुछ होने के बावजूद यहां के लोगों की कई आदतें बुरी है। मसलन पाबंदी के बावजूद खुले में शौच करने की आदत (ओडीएफ), इधर उधर थूकना, गुणवत्ताहीन तंबाकू का सेवन करना, नवजात शिशुओं का टीकाकरण कराने में संवेदनहीन होना, सार्वजनिक स्थलों के आसपास पेशाब करना, कहीं भी खाना और कूढ़ा वहीं पर फेंक देना..जैसी आदतों को सुधारने की जरूरत है। इसके लिए उन्हें प्रेरित करने की महती दरकार है।
एकजुट होकर शिक्षित करने की जरूरत:
महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य और खुशहाली में सुधार के उपायों पर विचार करने के लिए आयोजित इस सम्मेलन के अन्तिम सत्र के दौरान चिली के पूर्व राष्ट्रपति और पीएमएनसीएच के पूर्व बोर्ड के अध्यक्ष डा. मिशेल बाचेलेट का मानना है कि इंडियन्स आर ग्रेट, यहां के युवाओं की बुद्धिमता का परचम विभर में माना जाता है। लेकिन सबसे अधिक आबादी की ओर बढ़ रहे इस देश के लोगों को व्यवहार, सोच में बदलाव की जरूरत है। उन्हें प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत अभियान को गंभीरता पूर्वक सफल बनाना चाहिए। आदतों में सुधार जरूरी है। डा. बाचेलेट का मानना है कि बीते कुछ सालों में भारत में तेजी से प्रगति दर्ज की गई। लेकिन यह प्रगति जारी रहनी चाहिए। इस कार्यक्रम में जानीमानी अदाकारा तथा यूनीसेफ की सद्भावना दूत सुश्री प्रियंका चोपड़ा का मानना है कि लोगों में खासकर युवाओं, किशोरों में तेजी से बदलाव आ रहा है। वे सफाई अभियान हो या फिर स्वस्थ भारत से संबंधी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की प्रधानमंत्री आयुष्यमान भारत जन आरोग्य स्वास्थ्य योजना, टीकाकरण, कुपोषण मुक्त भारत, खुले में शौच मुक्त भारत के महाअभियान में तेजी से सफलता दर्ज की जा रही है। उन्होंन उम्मीद जताई की मुझे लगता है कि युवा विंग सभी अच्छी आदतों को अपनाएंगे।
पार्ट्र्स फोरम का उद्देश्य:
महिलाओं बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य और खुशहाली में सुधार के उपायों पर विचार करना है और उनके स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर वैिक उपायों को बढ़ावा देना है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चौथे भागीदार मंच का उद्घाटन किया था।
खास बातें, निष्कषर्:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएमएनसीएच फोरम के संरक्षक के रूप में काम करने पर सहमति जताई। भागीदार मंच एक वैिक स्वास्थ्य साझेदारी कार्यक्रम है जो सितंबर 2005 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य बच्चों और माताओं की मृत्यु दर में कमी लाना तथा किशोरों, बच्चों, नवजात शिशुओं और माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने के उपाय करना हैं। इसके सदस्यों में 92 देशों से एक हजार से अधिक शिक्षाविद्, अनुसंधानकर्ता, शिक्षण संस्थान, दानकर्ता और फाउंडेशन, स्वास्थ्य देखभाल व्यवसायी, बहुराष्ट्रीय एंजेसियां, गैर सरकारी संगठन, भागीदार राष्ट्र, वैिक वित्तीय संस्थान और निजी क्षेत्र के संगठन शामिल हुए।
यह भी:
इस मंच के पिछले सम्मेलन जोहानिसबर्ग, दक्षिण अफ्रीका (2014), नई दिल्ली, भारत (2010) और दारेस सलाम, तंजानिया (2007) में आयोजित किये गए थे। यह दूसरी बार है जब भारत इसकी मेजबानी कर रहा है। पीएमएनसीएच मिशन का उद्देश्य वि स्वास्थ्य समुदाय की सहायता करना है ताकि वह स्थायी विकास लक्ष्यों, विशेष कर स्वास्थ्य से संबंधित स्थायी विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में सफलता पूर्वक काम कर सकें।
इन विषयों पर हुई चर्चा:
इसकी वैिक कार्यनीति के उद्देश्यों-जीनाफलना-फूलना और रूपातंरण किया गया। इसमें 6 प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। जिनमें शैशवकाल, किशोरावस्था, स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, समानता और गरिमा, महिला सशक्तिकरण और बालिकाओं के स्वास्थ्य में सुधार शामिल था।

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