इंदिरा गांधी कला केंद्र के उमंग सभागार में लेखक व्यंग्यकार डॉक्टर चंद्रभानु शर्मा द्वारा लिखित नवीनत पुस्तक “मैं हूं चौकीदार” का लोकार्पण हुआ

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इंदिरा गांधी कला केंद्र के उमंग सभागार में लेखक व्यंग्यकार डॉक्टर चंद्रभानु शर्मा द्वारा लिखित नवीनत पुस्तक “मैं हूं चौकीदार” का लोकार्पण किया गया इस अवसर पर इंदिरा गांधी कला केंद्र के अध्यक्ष प्रतिष्ठित पत्रकार एवं संपादक रामबहादुर राय के अध्यक्षता, सांसद पश्चिमी दिल्ली प्रवेश साहिब सिंह वर्मा एवं नरेश शाण्डिल्य की उपस्थिति में किया गया।

श्री राम बहादुर राय ने अध्यक्षीय भाषण में विचार व्यक्त करते हुए पुस्तक को मनोरम आकर्षक तथा पाठक में पढ़ने की रुचि पैदा करती है। उन्होंने उल्लेख किया कि पुस्तक “मैं हूं चौकीदार” किसी व्यक्ति विशेष का गुणगान नहीं करती अपितु 2014 से 2021 तक राष्ट्र की तत्कालीन राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक परिदृश्य पर लेखक द्वारा सार्थक व्यंग करते हुए,लेखक-पाठक में
तत्कालीक परिदृश्य के प्रति चेतना पैदा करती है डॉ. चंद्रभानु शर्मा की शैली साहित्य विधा की मनोरम एवं आकर्षक बनाती है। लेखक ने राजनीतिक परिदृश्य में भाषा में निरंतता होने के कारण पाठक में रुचि बनाए रखती है उन्होंने प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का उल्लेख करते हुए कहा कि परसाई के व्यंग्य से लोग
नाराज हो जाते लेकिन “मैं हूं चौकीदार” का लेखन, स्पष्ट, सादा तथा सरल ढंग से निष्पक्ष होने के कारण रोचक तथा स्पष्ट बनी रहती है। मैं मानता हूं व्यंग्य की यह शैली साहित्यकार की तत्कालीन मानवीय भावों का सरल पूर्वक वर्तमान को भविष्य का आईना दिखाता है।

सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा द्वारा डॉ. चंद्रभानु के लेखन की प्रशंसा करते हुए जन चेतना का माध्यम बताया तथा लेखक द्वारा मुक्तको द्वारा सरलता से सभी संदर्भों का उल्लेख पुस्तक को रोचक बनाता है।

डॉ. चंद्रभानु से अपनी मुलाकात का वर्णन करते हुए कहा कि शर्मा जी लेखक व शिक्षण से जुड़े हैं कम शब्दों में राजनैतिक घटनाक्रम व व्यक्तित्व कम शब्दों में रेखांकित करते हैं स्वतंत्र शैली निष्पक्ष तथा विषय की सरलता से प्रस्तुति उनकी विशेषता है मैं पुस्तक के लोकार्पण पर गौरवान्वित महसूस करता हूं ईश्वर से प्रार्थनाकरता हूँ कि शर्मा जी शतायु तथा निरंतर इसी तरह के सार्थक व्यंग्य की रचना करते रहें।

वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक नरेश शाण्डिल्य द्वारा 2014 से 2021 तक तात्कालिक स्थितियों पर लेखक द्वारा छ: पंक्तियों में मुक्तक की प्रस्तुति को लेखक व लेखन की विशेषता बताते हुए उल्लेख किया “मैं हूं चौकीदार” में 19 खंड है तथा विषयों को बांटा गया है शाण्डिल्य ने उल्लेख किया है “मैं हूं चौकीदार” को किसी व्यक्ति विशेष की स्तुति गान समझना लेखक के प्रति अन्याय होगा। पुस्तक में डॉ. चंद्रभानु शर्मा जी ने सभी व्यक्तित्व व घटनाक्रम कार्यों की व्यंग्य शैली में निष्पक्ष विवेचना रोचक बनाती है। शाण्डिल्य द्वारा पुस्तक के मुक्तकों को सुनाकर  सार्थकता को स्पष्ट करते वर्तमान पाठक के लिए उपयोगी मनोरंजक बताया। लेखक द्वारा निष्पक्ष रूप से बड़ी संवेदनशीलता से तात्कालिक स्थितियों की समालोचना व्यंग्य की शैली में की है।

डॉ. चंद्र भानु शर्मा ने अपनी साहित्य यात्रा को महिला सशक्ति को समर्पित करते हुए अपनी पहले खंडकाव्य “उत्तरदाई कौन” का उल्लेख किया। साहित्यकार का उत्तरदायित्व समाज में व्यापक विसंक्तियों, अंधविश्वास, शोषण, कुविचारो को दूर कर समाज क्षेत्र, राष्ट्रीय हित और मानवता की ओर मोड़ता है। समाज को चेतना प्रदान करना है। डॉ. शर्मा ने अपनी पुस्तक “मैं हूं चौकीदार” के विषय की इस पुस्तक का इंतजार वैसे ही था जैसे कोई माँ वर्षों बाद किसी बच्चे के जन्म देने के लिए भावुक हो उन्होंने अपने जीवन में साहित्यिक रचनाएं धनोपार्जन आशय से नहीं किया डॉ. चंद्रभानु शर्मा ने मंच पर उपस्थित सभी का आभार व्यक्त किया। डॉ जितेंद्र तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक हिंदुस्तान, दैनिक समाचार तथा सर्वेश शर्मा ने सभी आमंत्रित
अतिथियों एवं सभागार में आमंत्रण लोगों का धन्यवाद दिया।

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