उन्नाव रेप विक्टिम: उसकी मृत्यु बुरी तरह से जलाने से हुई! -अपराह्न 3.30 बजे सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किया खुलासा

रिपोर्ट में जहर या दम घुटने जैसी तथ्य नहीं

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भारत चौहान /ज्ञान प्रकाश नई दिल्ली सफदरजंग अस्पताल प्लास्टिक एंड बर्न डिपार्टमेंट में वेंटीलेटर पर में करीब 44 घंटे जिंदगी से जूझते रहने के बाद हृदय गति से शुक्रवार को देर रात हुई मौत के बाद उन्नाव बलात्कार पीड़िता का शनिवार को पोस्टमार्टम कर दिया गया। इस मामले में अस्पताल प्रशासन मुस्तैद रहा। दरअसल, सुबह 10 बजे पोस्टमार्टम (शव विच्छेदन) के लिए ले जाया गया जो पूर्वाह्न 11 बजकर 45 मिनट तक चला। इसके बाद शव को अति सुरक्षा के घेरे में रखते हुए उसके भाई को सुपुर्द कर दिया गया। जिसे वे सरकारी एम्बुलेंस में उन्नाव के लिए रवाना हुए थे। इस दौरान पोस्टमार्टम हाउस के आसपास कड़ी सुरक्षा की गई थी। पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी हुई।
वहीं अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट पर सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने उसकी मृत्यु की वजह की भी पुष्टि कर दी। जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार ज्यादा जलने की वजह से पीड़िता की मौत हुई। बता दें कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव में जमानत पर बाहर आए आरोपियों ने रेप पीड़िता को जिंदा जला दिया था। शुक्रवार की रात करीब 11 बजकर 40 मिनट पर सघन चिकित्सा कक्ष में वेंटीलेटर पर उसकी हृदयगति बंद होने से मृत्यु हो गई थी।
पोस्टमार्टम में खुलासा:
अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक डा. सुनील गुप्ता ने रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी दी कि जहर देने या दम घुटने से मौत जैसा कुछ पोस्टमॉर्टम में नहीं आया है। ऑटोस्पाइ से पता चला है कि पीड़िता की मौत अधिक जलने की वजह से हुई है। डा. गुप्ता ने बताया कि सुबह ऑटोस्पाइ करवाया गया था। दरअसल, 90 फीसद जलने की पुष्टि पीड़िता की जब उसे विगत बृहस्पतिवार की रात 8 बजकर 22 मिनट पर यहां एअर लिफ्ट कर लाया गया था तभी जांच के बाद प्लास्टिक एंड बर्न डिपार्टमेंट के हेड डा. सलभ कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम ने क्षतिग्रस्त हिस्सों का आकलन किया था उसके बाद ही उन्होंने आधिकारिक बयान जारी करते हुए रह बताया था कि वह 90 फीसद तक जली अवस्था में है। हालांकि उसकी नब्ज तो चल रही थी, लेकिन वह बेहोश थीं।
मरना नहीं चाहती..उन्नाव की बेटी:म
इस घटना के बारे में पीड़िता के भाई ने कहा कि उस दिन उसने मुझे कहा कि भैया मुझे रायबरेली कोर्ट जाना है। जिस पर मैंने उसे कहा कि हम में से कोई साथ में जाएगा। वह कपड़े चेंज करके बाहर निकली और हम पीछे से आ रहे थे। वह मुश्किल से कुछ दूर गई होगी कि गांव में हल्ला हुआ कि एक लड़की को जला दिया गया। हम भाग कर वहां पहुंचे तो देखा कि मेरी बहन का शॉल वहां पड़ा हुआ था। पुलिस हमसे पहले पहुंच गई थी और उसे अस्पताल ले गई। अस्पताल में उसने कहा था कि भाई इन दरिंदों को छोड़ना नहीं, जैसी मेरी दुर्गति की है उसी तरह उन पांचों की दुर्गति करना। मुझे बचा लो भाई मैं जीना चाहती हुं।

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