विश्व में शांति के लिए सिद्ध चक्र विधान का आयोजन

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भारत चौहान नई दिल्ली , श्री दिगंबर जैन मंदिर, सूरजमल विहार में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया गया है। विधान के संयोजक (टी टुडे) राकेश जैन के अनुसार विभर में फैल रहे कोरोना वायरस से मच रहे कोहराम तथा पिछले दिनों दिल्ली में हुए दंगों के कारण फैली अशांति और दंगों में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति व सद्भावना के लिये इस विधान का आयोजन किया गया है। जैन परंपरा में पूजा, उपासना का विशेष महत्व है। इनमें से सिद्धचक्र महामंडल विधान की और भी अधिक महिमा है। यह एक ऐसा अनुष्ठान है जो हमारी जीवन के समस्त पाप-ताप और संताप को नष्ट कर देता है। सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य-कृत्य, चक्र का अर्थ है समूह और मंडल का अर्थ एक प्रकार के वृताकार यंत्र से है। इनमें अनेक प्रकार के मंत्र व बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है। मंत्र शास्त्र के अनुसार, इसमें अनेक प्रकार की दिव्य शक्तियां प्रकट हो जाती है। सिद्धचक्र महामंडल विधान समस्त सिद्ध समूह की आराधना मंडल की साक्षी में की जाती है, जो हमारे समस्त मनोरथों को पूर्ण करती है।
पुराणों के अनुसार मैना सुंदरी ने इसी सिद्धचक्र महामंडल विधान के आयोजन से अपने को ही पति श्रीपाल को कामदेव जैसा सुंदर बना दिया। उन्होंने बताया कि फाल्गुन, कार्तिक व आषाढ़ के अंतिम आठ दिन अष्टमी से पूर्णिमा तक यह पर्व आता है। इन आठ दिनों में सिद्धों की यह विशेष आराधना के लिए सिद्धचक्र विधान किया जाता है। जैन के अनुसार बीते 2 मार्च को प्रारंभ हुए इस विदान में प्रतिदिन अभिषेक,शांतिधारा,नित्यनियम पूजा एवं विधान होता है। जो 9 मार्च को हवन के साथ इसका समापन होगा।

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