निजी फार्मास्यूटिकल कंपनी ने सैन्य अस्पताल को नियम कानून ताक पर रख आपूर्ति किए दो गुनी कीमत पर र्थड जनरेशन दवाएं! -आर्म्स फोर्सेस मेडिकल सर्विसज ने सर्च कमेटी गठित कर जांच शुरू की -र्थड जनरेशन इंजेक्शन रिकाम्बीनेंट फैक्टर 8-500 आईयू हीमोफीलिया मरीजों को लगाई जाती है

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ज्ञानप्रकाश नई दिल्ली , सैनिकों को दी जाने वाली जीवनरक्षक श्रेणी में शामिल दवाओं की आपूर्ति करने के मामले में आर्म्स फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (एएफएमएस) ने एक निजी कंपनी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का फैसला किया है। प्राप्त दस्तावेज के अनुसार नोवो नॉरडिस्क नामक फार्मास्यूटिक कंपनी ने धौला कुआं के दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हास्पिटल रिसर्च एंड रेफरल (आर एंड आर) को हीमोफीलिया मरीजों को दिए जाने वाले इंजेक्शन रिकाम्बीनेंट फैक्टर 8-500 आईयू (र्थड जनरेशन) की दवाएं अन्य सरकारी अस्पतालों की अपेक्षा लगभग दोगुना कीमत कीदर पर प्रति इंजेक्शन आपूर्ति किया। जो कानूनी तौर पर नियमों की अनदेखी करने के दायरे में आता है।
इंजेक्शन वहीं, कीमते अलग अलग:
जानकारी के अनुसार जिसकी प्रति इंजेक्शन कीमत 13 हजार 100 रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) के हिसाब से वसूल की। निविदा आदेश संख्या पीए टीडीआर. 2437-2433/एमएस/एक्स/डीजीएलपी-ईसीएचएस/पीए-01(पीएसी ड्रग्स)/2017 वर्ष 2017-2018 (06-2017 से 26-06-2018) की अवधि में आपूर्ति की। हैरत वाले तथ्य ये है कि इसी कंपनी ने इसी अवधि के दौरान सेंट्रल रेलवे हास्पिटल, मुबंई को आदेश संख्या सीआरएम1718103880058 के तहत 11 अप्रैल 2018 प्रति इंजेक्शन की कीमत 7575 रुपये की दर पर आपूर्ति की। यही नहीं इसी कंपनी ने सरकारी अस्पताल, वरवाली को र्थड जनरेशन के इंजेक्शन की आपूर्ति सिर्फ 6069 रुपये प्रति इंजेक्शन जबकि तेलंगाना मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कारपोरेशन, सरकारी उपक्रम के तहत परिचालित, को 7999 रुपये प्रति इंजेक्शन की दर पर आपूर्ति की। सभी नोवो फार्मास्यूटिकल कंपनी ने इरादतन सैन्य अस्पताल को दो गुना कीमत पर इंजेक्शन की आपूर्ति की है।
आर्म्स फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज के महानिदेशक लेफ्टि.जन. विपिन पूरी ने आर्म्स अधिनियम के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नियम कहता है कि सैन्य हास्पिटल व सैन्य संस्थानों को अन्य सरकारी और गैर सरकारी उपक्रमों की अपेक्षा दवाओं की आपूर्ति करने संबंधी कीमतें कम होनी चाहिए। यदि इस मामले में अनियमितता पाई जाती है मसलन अन्य सरकारी अस्पतालों को कोई कंपनी उसी उत्पाद की आपूर्ति कम कीमत पर करती है, तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत चार्ज बनता है। स्पष्ट है कि आर्मी हास्पिटल को फार्मास्यूटिकल कंपनी ने जानबूझ कर नियमों की अनदेखी करते हुए दोगुनी कीमत पर इंजेक्शन की आपूर्ति की है। जो दंडनीय अपराध है।
कमेटी करेगी जांच:
मामले की जांच के लिए एक सर्च कमेटी का गठन किया गया है। जो ज्यादा कीमत पर इंजेक्शन खरीदने की अनुमति देने, फिर उसी कंपनी को 26 जुलाई 2019 पुन: 13 हजार 100 रुपये प्रति इंजेक्शन आपूर्ति करने का अनुमति देने के मामले आर्मी अस्पताल के कम से कम चार से अधिक अधिकारियों की भूमिका शक के दायरें आ रही है। कमेटी यह भी जांच करेगी कि यह चूक मानवीय हुई या फिर जानबूझ कर किया गया है।

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