निजी पैथलैब्स की रिपोर्ट कहती है कोरोना पॉजिटिव सरकारी लैब में जांच में निगेटिव -निजी पैथलैब्स की 60 फीसद कोरोना जांच रिपोर्ट में कन्फ्यूजयन

डीएमसी ने दिए गुणवत्ता में सुधार के निर्देश, मरीज है सांसत में

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ज्ञानप्रकाश नई दिल्ली, करीब दो करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में लॉकडाउन के 4.0 चरण यानी अब तक 1 लाख 45 हजार 854 टेस्ट किए जा चुके हैं। दरअसल, इसके पीछे सरकारी जांच एजेंसियों और निजी पैथलैब्स के मध्य रिपोर्टिग सिस्टम और जांच गुणवत्ता में तालमेल नहीं बन पा रहा है। इस सच्चाई को तह में जानने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय संचारी रोग नियंतण्रसंस्थान (एनसीडीसी) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इनफॉरमेटिक्स एंड रिसर्च (एनसीडीआईआर) ने दिल्ली सरकार द्वारा संग्रहित कोविड-19 टेस्ट की स्कैनिंग के साथ ही ऑडिटिंग कर रहा है। जांच के पहले चरण में 60 फीसद ऐसे मामले पाए गए हैं जो पीसीआर, एंटी बॉडीज टेस्ट निजी पैथलैब्स द्वारा किए गए हैं दूसरे चरण में उन्हीं पेशेंट्स की सरकारी लैब्स में जांच होने पर विपरीत परिणाम मिले है।
टेस्ट ऑडिटिंग टीम से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जांच में यह पाया गया है कि 10 में से 6 संदिग्धों की रिपोर्ट निजी पैथलैब्स कोरोना पॉजिटिव दे रहे हैं लेकिन उन्हीं पेशेंट्स की जब अधिकृत सरकारी पैथलैब्स में पुन: जांच कराया तो उसमें से 47 फीसद निगेटिव पाए गए। अधिकारी ने कहा कि इस कन्फ्यूजन की पुष्टि उन दस्तावेजों से हम कर सकते हैं कि जिनकी मृत्यु कोविड पॉजिटिव होने के साथ ही अन्य गंभीर बीमारियों से हुई। लेकिन दिल्ली सरकार ने ऐसे सैकड़ों मरीजों को नान कोविड श्रेणी में दिखाता रहा। जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की कमेटी ने डेथ का ऑडिट किया तो उसका उलट हुआ। अचानक इस प्रक्रिया से दिल्ली में कोविड से मरने वालों का ग्राफ बढ़कर 167 हो गया। जोकि सप्ताह भर पहले तक 70 से 75 का आंकडा भी पार नहीं कर सका था। डेथ ऑडिट के बाद ही कुछ ही दिन में मृत्युदर बढ़कर डबल हो गई है। एनसीडीआईआर के निदेशक डा. प्रशांत माथुर ने कहा कि जल्द ही हम अन्तिम निर्णय पर पहुंचेंगे। निजी पैथलैब्स को कोविड टेस्टिंग के लिए निर्धारित अन्तरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप ही जांच करनी होगी।
नहीं मिला पेमेंट:
स्वास्थ्य विभाग ने कोविड संदिग्धों की जांच के लिए 17 निजी पैथलैब्स को अधिकृत किया है। जिन्हें हर जांच की एवज में 4500 रुपये सरकार ने अदा करने का वादा किया है। निजी पैथलैब्स के एक अधिकारी ने कहा कि अब तक हमें जांच की एवज में फुटी कौडी तक नहीं दी गई है। हम चाहते हुए भी मरीजों की जांच उस गति से नहीं कर पा रहे हैं जितनी की लॉडकाउन के तीसरे चरण में कर रहे थे। जो हमें पेमेंट कर रहा है हम उनकी जांच करते हैं। लेकिन 80 फीसद तो यह कहते हुए झगड पड़ते हैं कि सरकार ने तो हमें मुफ्त में जांच कराने की सुविधा प्रदान की है।
निजी कैथलैब को भेजा नोटिस:
दिल्ली सरकार की स्वायत्त संस्था दिल्ली मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डा. गिरीश त्यागी ने कहा कि जांच करना अनिवार्य है। प्राप्त शिकायतों के मद्देनजर 4 पैथलैब्स को नोटिस भेजा गया है।

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