आयुष मंत्रालय जुटा अब स्वदेशी पद्धति और एलोपैथ स्वास्थ्य सेवाएं पैरल देने के लिए

छह मंत्रालय एक मंच पर तैयार कर रहे हैं योजना, 6 सचिव स्तरीय बैठक हो चुकी है संपन्न - मकसद योग, आयुव्रेद, होम्योपैथ, यूनानी, सिद्धा के औषधीय तत्वों की पहचान अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर लाना - ताकि मेडिकल टुअरिज्म में एलोपथी की तरह ही आयुष पद्धतियों के प्रति लोगों का बढ़ भरोसा - सभी सेवाएं हर अस्पताल, ब्लाक स्तर के पीएचसी सेंटर में करने की है योजना

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ज्ञानप्रकाश
नई दिल्ली, भारतीय चिकित्सा पद्धतियों (आईएसएम) की विलुप्त होते कई दुर्लभ औषधीय पौधों, जड़ी बूटियों के संरक्षण के साथ ही योग, आयुव्रेद, होम्योपैथ, यूनानी, सिद्धा, प्राकृतिक समेत अन्य स्वदेशी पद्धतियों को वैज्ञानिक आधार देने में अब आयुष मंत्रालय के वैज्ञानिक जुट गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशन में गठित 6 मंत्रालय के विशेषज्ञ एक मंच पर योजनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इसके पीछे मकसद यह भी है कि स्वदेशी पद्धतियों को अन्तरराष्ट्रीय बाजार में मेडिकल टुअरिज्म के दायरे में वैज्ञानिक पुष्टि के साथ लाया जाए। दरअसल, आईएसएम पद्धतियों से तैयार स्वदेशी औषधीयों की प्रमाणकिता के मामले में अन्तरराष्ट्रीय औषध गुणवत्ता के मानदंडों पर खरी नहीं उतार पा रही है। इस कमी को दूर करने के लिए संभवत: देश की आजादी के बाद पहली बार आयुष मंत्रालय के साथ केंद्रीय एवं परिवार स्वास्थ्य मंत्रालय, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), केंद्रीय रसायन मंत्रालय समेत 6 मंत्रालय को शामिल किया गया है। सीएआईआर जो विविध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अपने अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास ज्ञान आधार के लिए जाना जाता है, एक समकालीन अनुसंधान एवं विकास संगठन है।
आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद यह है कि देशी पद्धतियों से तैयार दवाओं के मानक, उपचार के तौर तरीकों को मार्डन पद्धति (एलोपैथ) के समक्ष लाया जाए। ताकि स्वदेशी औषधियों को एलोपैथ की तर्ज पर अवयवों की जांच की पुष्टि राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं से की जाए। ऐसा करने से यह तय है कि दुनियाभर में जिस तरह से योगिक क्रियाओं को लोग अपना कर अपना जीवन सुधार रहे उसी तर्ज पर लोग भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के तहत आने वाली स्वदेशी शल्यक्रिया, हर्बल दवाओं के प्रति भरोसा रखे। इस योजना को अंजाम देने के लिए बीते चार माह के दौरान 6 से अधिक बार सचिव स्तर की बैठक हो चुकी है। वैसे तो इस योजना पर केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के साथ ही राष्ट्रीय आयुष मिशन की स्थापना की गई थी।वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), जो विविध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अपने अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास ज्ञान आधार के लिए जाना जाता है, एक समकालीन अनुसंधान एवं विकास संगठन है। आयुष मंत्रालय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
उद्ेश्य की ओर हैं योजना:
केंद्रीय आयुष मंत्री सर्वानंद सोनोवाल का मानना है कि राष्ट्रीय आयुष मिशन की केंद्र प्रायोजित योजना का उद्देश्य आयुष अस्पतालों और औषधालयों के उन्नयन के माध्यम से सार्वभौमिक पहुंच के साथ लागत प्रभावी आयुष सेवाएं प्रदान करना है।इसके अलावा आयुष शिक्षा का उन्नयन कर राज्य स्तर पर संस्थागत क्षमता को मजबूत करना है। इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में से एक संस्थानों और 50/30/10 बिस्तरों वाले एकीकृत आयुष अस्पताल की स्थापना भी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2023-24 तक की अवधि के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन के माध्यम से कार्यान्वयन के लिए आयुष्मान भारत के तहत 12,500 आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र) के संचालन को भी मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य आयुष सिद्धांतों और प्रथाओं के आधार पर एक समग्र स्वास्थ्य मॉडल की सेवाएं प्रदान करना है ताकि बीमारी के बोझ को कम किया जा सके और जनता को स्व-देखभाल के लिए सशक्त बनाया जा सके। 2025-26 तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयुष सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इन 50 बिस्तरों वाले आयुष अस्पतालों के निर्माण से जनता को उनके समग्र स्वास्थ्य के लिए विभिन्न आयुष चिकित्सा पद्धतियों का उचित लाभ मिलेगा। आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण मुख्य रूप से प्राथमिक स्तर पर किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आयुष सिद्धांतों और प्रथाओं के आधार पर लोगों के समग्र स्वास्थ्य की देखभाल करना है, ताकि लोग स्वस्थ जीवन जी सकें।

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