-उफ्फ जाएं तो जाएं कहा:एम्स हो आरएमएल या फिर सफदरजंग..ठिठुरन भरी सर्दी, वायु प्रदूषण, कोहरा इस पर गंभीर बीमारी! -इन बड़े अस्पतालों के बाहर फुटपाथ पर रात बिताने को लोग मजबूर, ठंड से परेशान

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ज्ञानप्रकाश नई दिल्ली, राजधानी दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो इस बार दिल्ली में शिमला से भी ज्यादा ठंड पड़ रही है। राजधानी में तापमान 4 डिग्री तक पहुंच गया। यहां पड़ रही कड़ाके की ठंड से लोग काफी परेशान हैं। पहाड़ों में बर्फ बारी के कारण यहां काफी ज्यादा सर्दी पड़ रही है। दिल्ली में ठंड बढ़ने से सबसे ज्यादा परेशानी खुले आसमान के नीचे सोने वाले लोगों को हो रही है। हवा में आर्दता का स्तर 67 प्रतिशत दर्ज किया गया।


सबसे ज्यादा असर तीन अस्पतालों में:
इसका सबसे ज्यादा असर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विख्यात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), सफदरजंग और डा. आरएमएल हास्पिटल परिसर में देखा गया है। लोग प्रदूषित वायु, कोहरा इस पर ठिठुरन भरी ठंड और गंभीर बीमारी से दो चार हो रहे हैं।
आरोप:
हृदय वक्र तंत्रिका विज्ञान केंद्र के बाहर बने प्रतीक्षालय में करीब 100 से ज्यादा ऐसे लोग ठहरे हुए थे जिनके रिश्तेदारों का यहां सर्जरी प्रक्रिया चल रही है, या फिर वे आईसीयू, सीसीयू में गंभीर हालत में भर्ती है। जबकि इससे दो गुना ज्यादा रिश्तेदार और मरीज इस उम्मीद में एम्स परिसर के आसपास कोनों में शरण लिए हैं, कि बिस्तर खाली होगा और उन्हें भर्ती कर लिया जाएगा। बिहार के अररिया जिला के रोहित यादव ने कहा कि एम्स प्रशासन की ओर से कोई सुविधा नहीं दी गई है। पैसों की तंगी के चलते मेरे अलावा यहां अन्य लोग हॉस्पीटल के बाहर ही फुटपाथ पर सो जाते हैं। एम्स में इलाज कराने देशभर से लोग आते हैं ऐसे में कई दिन लगातार इलाज कराने के चलते उन्हें यहीं ठहरना पड़ता है। कमोवेश यही हालत सफदरजंग और आरएमएल हास्पिटल के बाहर देखी गई।
ठंड ने बढ़ाई मुस्किलें:
jab दिल्ली पत्रिका की टीम इनकी स्थिति जानने पहुंची तो देखा कि खुले आसमान के नीचे ठंड और बारिश ने इन लोगों की मुश्किलों को दोहरा कर दिया था। आसमान से टपक रही ठंडी बूंदों ने इनके सड़क के आशियाने को गीला कर दिया था। बिहार के सीवान से आए राजू वैद्य कहते हैं कि वो पिछले 3 दिन से यहीं फुटपाथ पर सो रहे हैं क्योंकि उन्हें सुबह 8 बजे पर्ची के लिए लाइन में लगना होता है, वहीं दूसरी तरफ यूपी के बुलंदशहर से आए मुन्ना देव ने बताया कि हमें बहुत दु:ख होता है कि देश के सबसे बड़े अस्पताल के बाहर ये हालात हैं कि सरकार कुछ के ठहरने के लिए अबतक एम्स के बाहर रैन बसेरा नहीं बना पाई है।
सड़क पर सोने को मजबूर लोग:
एम्स के जिस बस स्टैंड के नीचे 50-60 लोग सड़क पर सोने की कोशिश कर रहे थे उसी स्टैंड पर सरकार का चमकदार विज्ञापन लगा था, जिसमें हंसते हुए परिवार को दिखाया गया था। मगर हकीकत की जमीन पर नजारा कुछ और था। देश के कोने- कोने से आए इन मरीजों और मरीजों के परिजनों को फुटपाथ पर रातें बितानी पड़ रही हैं। कड़ाके की ठंड जोर पकड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ एम्स के बाहर सोते इन लोगों की आवाज़ सरकारी नक्कारखाने में ठंडी पड़ जाएगी या कम से कम ओस की सर्दी में सोने लायक चंद जगह सरकार इन्हें दिला पाएगी ये देखना होगा।
प्रशासन ने दिया तर्क :
एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि हम उन्हीं मरीजों की जिम्मेदारी लेते हैं जो यहां भर्ती होते हैं, तो वहीं सफदरजंग के एमएस डा. राजेद्र शर्मा ने कहा कि हर संभव यहां पर मरीजों को बेहतर उपचार दे रहे हैं, जो लोग फूटपाथ पर सोते हैं उनका अपना व्यक्ति फैसला होता है। तो आरएमएल के एमएस डा. वीके तिवारी ने कहा कि अस्थायी रैन बसेरा एनडीएमसी बनाती है, यहां पर मरीजों को हर स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं देते हैं।

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