स्वास्थ्य विभाग सख्त, नीम हकीमों पर लगेगी लगाम! -एलायड एवं हेल्थेकेयर प्रोफेशनल्स बिल- 2018 की फूल प्रूफ तैयारी -अनुमान है कि दिल्ली समेत देशभर में 7 करोड़ नकली डाक्टर अधकचरी स्वास्थ्य सेवाएं दे कर रहे मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़

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ज्ञानप्रकाश नई दिल्ली, राजधानी के गली मोहल्लें हो या फिर पॉश कालोनी हर जगह नकली डाक्टरों की पौबारह है। दिल्ली सरकार ने इनी धड़कपकड़ के लिए औषधि प्रशाधन अधिनियम 1940 के तहत कार्रवाई करने के लिए दिल्ली मेडिकल काउंसिल के साथ ही इंडियन मेडिकल एसोसिए शन (आईएमए), दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) जैसे अन्य कई स्वास्थ्य संगठन की जरिए एंटी क्वेकरी के खिलाफ अभियान चलाया। जो बेदम साबित हो रहा है। अब इसके सटीक तोड़ के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एलाएड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल बिल -2018 तैयार किया है।
एम्स में आयोजित सम्मेलन के दौरान नीति आयोग के सदस्य एवं आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के संयोजक डा. वीके पॉल ने राष्ट्रीय सहारा से कहा कि मंत्रिमंडल ने एलायड एवं हेल्थेकेयर प्रोफेशनल्स बिल- 2018 को मंजूरी दे दी है। सदन में चर्चा के लिए जल्द ही पेश होगा। फिजियोथेरेपिस्ट भी काफी उत्साहित हैं। इस विधेयक में फिजियोथेरेपिस्टों सहित स्वास्थ्य पेशेवरों के शिक्षा और प्रशिक्षण और सेवाओं को विनियमित और मानकीकृत करने का प्रस्ताव किया गया है।
नकली डाक्टरों पर लगेगा अंकुश:
दिल्ली समेत देशभर में रजिस्ट्रर्ड मेडिकल प्रैक्टिशरत (आरएमपी) समेत करीब 7 करोड़ नकली डाक्टरों की प्रैक्टिस पर अंकुश लगेगा। कानून लागू होने के बाद जिनके पास किभी पैथी की डिग्री नहीं है, वह स्टेट मेडिकल काउंसिल से रजिस्र्टड नहीं है, और वे फिर भी मरीजों को एलोपैथ व भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के जरिए अन्य प्रकार की दवाएं प्रेस्क्राइब्ड करते पाए जाएंगे उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। इसके तहत आईपीसी की 304, 304ए जैसी धाराओं का प्रावधान है। पुलिस को भी इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार होगा। इस सख्ती के पीछे दरअसल, सरकार का मकसद यह है कि मरीज नकली डाक्टरों के चंगुल में न फंसे, वे जिस भी डाक्टर के पास परामर्श के लिए जाएं वह असली डाक्टर हो, ताकि उनके जीवन के साथ खिलवाड़ न हो।
ऐसे कानूनों की है दरकार:
एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि ऐसे विधेयक पहले ही पारित हो जाना चाहिए था, एम्स में आने वाले अनुमान है कि 33 फीसद ऐसे मरीजों का दबाव रहता है जो बीमारी शुरू होने के पहले चरण में आसपास नकली हकीमों से इलाज करा चुके रहते हैं। इनमें दमा, अस्थमा, आंतों संबंधी विकृतियां, हाइड्रोसील, न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर, गठिया, एड्स, हेपेटाइटिस, कैंसर, मधुमेह आदि शामिल है। नकली डाक्टर शर्तिया इलाज का दावा करते हैं, यही वजहें हैं मरीज उनकी गिरफ्त में आसानी से आ जाते हैं। कानून बनने से वे अपनी गंदी आदतों को छोड़ेंगे। जिससे मरीजों का जीवन बचेंगे।
सख्त होंगे नियम:
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स के अध्यक्ष डा. संजीव झा ने बताया कि जब बिल आएगा तो फिजियोथेरेपी में पंजीकरण, मान्यता, मानक, शिक्षा की गुणवत्ता की पण्राली को नियमित किया जा सकेगा और इससे अप्रषिक्षित लोगों द्वारा अकुशल प्रैक्टिस एवं फिजियोथिरेपी में नीम हकीमों पर रोक लगाई जा सकेगी। डा. निर्मल कुमार ने कहा कि यह सकारात्मक पहल है।

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