ब्लूम्सबरी प्रोफेशनल इंडिया ने प्रिंसिपल आफ लॉ ऑफ कांट्रैक्ट लांच किया

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भारत चौहान, वैश्वीकरण की गोद में विधि (कानून) का अध्ययन बहु-क्षेत्रीय
और बहुद्देशीय शिक्षा बन गया है जहां पिछले कुछ वर्षों में बदलाव, संशोधन और कई नई चीजें
देखने को मिली हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मुताबिक भारत में करीब 950 लॉ स्कूलों से
हर साल लगभग 60,000-70,000 विद्यार्थी स्नातक होकर निकलते हैं। मौजूदा वृद्धि दर,
प्रतिस्पर्धा और भारत में कानून की क्रांति को देखते हुए ब्लूम्सबरी प्रोफेशनल इंडिया ने दि
प्रिंसिपल ऑफ लॉ ऑफ कांट्रैक्ट शीर्षक से पेपरबुक का पहला संस्करण लांच किया जिसके
लेखक प्रोफेसर (सेवानिवृत्त) आर.सी. श्रीवास्तव और आशुतोष पाठक हैं। ब्लूम्सबरी प्रोफेशनल
इंडिया अंतरराष्ट्रीय कर, भारतीय प्रत्यक्ष कर और कॉरपोरेट लॉ के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता का
कंटेट प्रकाशित करने में अग्रणी है।
स्वाध्याय के लिए एक ही जगह सभी चीजें उपलब्ध कराने के विजन के साथ 30 साल से
अधिक का अनुभव रखने वाले प्रोफेसर आर.सी. श्रीवास्तव ने अशोक पाठक के साथ मिलकर
कानून के सामान्य सिद्धांतों पर एक समग्र पुस्तक लिखी है जो लॉ की पेशकश कर रहे सभी
विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम की आवश्यकता के अनुरूप है। इस मौके पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री
श्री शिव प्रताप शुक्ला मौजूद थे।
यह पेपरबुक एक आसान सुबोधगम्य पुस्तक है जिसे कानून की पढाई कर रहे विद्यार्थी,
अधिवक्ता, अनुसंधानकर्ता और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रहे छात्र भी आसानी से
समझ सकते हैं। इसमें कांट्रैक्ट लॉ के सैद्धांतिक और व्यवहारिक पहलुओं और इसके रेखांकित
सिद्धांतों पर ध्यान दिया गया है और यह विद्यार्थियों को सिद्धांत एवं व्यवहार का सही मिश्रण
उपलब्ध कराती है। इस पुस्तक में ढेरों मामलों का शामिल किया गया है और इसके उदाहरण
कानूनी प्रावधानों एवं कांट्रैक्ट लॉ की पहेलियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं जिससे विद्यार्थियों
को कांट्रैक्ट लॉ को बेहतर ढंग से समझने में सहूलियत मिलती है। साथ ही इस कानून के
विधिक प्रावधानों को इस पुस्तक में बहुत सटीक ढंग से उपलब्ध कराया गया है।

इस पुस्तक के बारे में दि प्रिंसिपल ऑफ लॉ ऑफ कांट्रैक्ट के लेखक प्रोफेसर श्रीवास्तव ने कहा,
“कानून की किताबें विद्यार्थी से अधिवक्ता बनने तक की यात्रा में मूल्यवान साथी होती हैं। ये
विधि के पेश की जानकारी देती हैं, प्रेरित करती हैं, सोचने की सामग्री उपलब्ध कराती हैं, प्रवृति
को आकार प्रदान करती हैं, प्रमुख कौशल विकसित करती हैं और किसी विशेष क्षेत्र में रुचि पैदा
करती हैं। दि प्रिंसिपल ऑफ लॉ ऑफ कांट्रैक्ट को पाठ्य सामग्री को ध्यान में रखकर डिजाइन
किया गया है। इंडियन कांट्रैक्ट एक्ट, 1872 के सभी प्रावधानों की व्याख्या उदाहरण, केस लॉ,
तर्क एवं अवधारणाओं के साथ की गई है जिससे विद्यार्थी इन्हें समझ सकें और परीक्षाओं के
लिए इन्हें याद रख सकें।”
इस पुस्तक का मूल्य 470 रुपये रखा गया है और दि प्रिंसिपल ऑफ लॉ ऑफ कांट्रैक्ट इस
विषय की मूल अवधारणाओं को एक व्यवस्थित ढंग से परिलक्षित करता है जिससे विद्यार्थी न
केवल कक्षा में अध्ययन के लिए, बल्कि कॉरपोरेट की दुनिया में इसे लागू करने के लिए स्वयं
को तैयार कर सकें।
लांचिंग के मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्लूम्सबरी पब्लिशिंग इंडिया की प्रबंध
निदेशक निकिता जैन ने कहा, “किताबें किसी भी विषय की मूल अवधारणाओं को एक बहुत
सटीक ढंग से और समझने में आसान भाषा में प्रस्तुत करती हैं। कानून की पढ़ाई की पेशकश
कर रहे सभी विश्वविद्यालयों के मौजूदा पाठ्यक्रम की आवश्यकताओं के आधार पर दि प्रिंसिपल
ऑफ लॉ ऑफ कांट्रैक्ट न केवल विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान उपलब्ध कराता है, बल्कि
कानून के व्यवहारिक पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने की कुशाग्रता के साथ उन्हें सशक्त
करता है।”
इस मौके पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री श्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा, “सैद्धांतिक और व्यवहारिक
ज्ञान के शानदार मिश्रण से यह पुस्तक विद्यार्थियों को न केवल कानून के मौजूदा परिदृश्य को
आसानी से समझने में, बल्कि भावी कॉरपोरेट आवश्यकताओं से निपटने के लिए नीव रखने में
भी मदद करेगी।”
लेखक के बारे में

प्रोफेसर आर.सी. श्रीवास्तव एमबीए, एलएलएम हैं और गोरखपुर स्थित दीन दयाल उपाध्याय
युनिवर्सिटी के लॉ के प्रोफेसर रहे हैं। उन्होंने 30 से भी अधिक वर्षों से विद्यार्थियों को टॉप
कराया है। वह विधि में स्नातकोत्तर हैं और मर्केंटाइल लॉ पर उनकी जबरदस्त पकड़ है।
आशुतोष पाठक एलएलबी हैं और कानून की प्रैक्टिस में उन्हें 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
वर्तमान में वह उच्चतम न्यायालय में एक अधिवक्ता हैं और भारत में विभिन्न न्यायिक
परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए सर्वोत्तम संस्थानों में से एक राहुल आईएएस
से भी जुड़े रहे हैं। वह युनिवर्सिटी में टॉपर रहे हैं और गोल्ड मेडल हासिल किया है। उनके पास
लॉ में मास्टर डिग्री भी है और वह नेट की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं।

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