अस्पताल के दरवाजे पर झाड़-फूंक से इलाज -लोकनायक अस्पताल के बाहर होता है काम -तीन हजार से ज्यादा बीमारियों का इलाज करने का दावा -कैंसर से लेकर बांझपन तक का कर रहे इलाज -एमसीडी और अस्पताल प्रशासन बेखबर

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ज्ञानप्रकाश
नई दिल्ली , राजधानी के बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार लोकनायक अस्पताल के बाहर इन दिनों झाड़-फूंक का धंधा जोरों से चल रहा है। जिसे अस्पताल में इलाज नहीं मिलता, वह अस्पताल के बाहर बैठे नीम हकीमों (तथाकथित बाबा) नकली डॉक्टर से झाड़-फूं क के जरिए इलाज करवा रहे हैं। इलाज भी सिर्फ एक बीमारी का नहीं बल्कि 3 हजार से ज्यादा बीमारियों का इलाज है इनके पास। एक तरफ कहा जाता है कि डॉक्टर के अलावा किसी ओर से इलाज ना करवाया जाए, दूसरी तरफ अस्पताल के बाहर बैठकर ही कैंसर से लेकर बांझपन तक का इलाज झाड़ा लगाकर किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इलाज करने वाले का दावा है कि वह सारा इलाज पानी से करते हैं। ऐसे में यह एमसीडी, दिल्ली सरकार और अस्पताल प्रशासन पर सवाल खड़ा करता है क्योंकि अस्पताल के बाहर का सारा काम एमसीडी के हाथ में है और यह इलाज अस्पताल के एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक के बाहर ही किया जा रहा है लेकिन आते-जाते भी अस्पताल प्रशासन की इस ओर कभी निगाह ही नहीं पड़ी।
इन बीमारियों का करते हैं इलाज:
इनसे जब पूछा गया तो इन्होंने बताया कि झाड़ और पानी के द्वारा यहां तीन हजार से ज्यादा बीमारियों का इलाज किया जाता है। कैंसर, पीलिया, पथरी, बिच्छू काटा, सांप का झाड़, मधुमेह, बांझपन, दिल की बीमारी, दांत का दर्द और छाती के दर्द सहित कई अन्य बीमारियां शुमार हैं। जिन लोगों को अस्पताल में इलाज नहीं मिल पाता, वह इनकी तरफ चले आते हैं। हालांकि अभी तक इनके इलाज से किसी प्रकार के नुकसान की कोई जानकारी नहीं मिली है लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लोगों से इलाज करवाना खतरे से खाली नहीं है।
दुश्मन को भी बर्बाद किया जाता है:
बीमारियों का इलाज तो एक अलग बात है, यहां तो दुश्मन को बर्बाद करने से लेकर जालिम को खत्म करने तक का भी काम किया जाता है। इनके पोस्टर पर यह दावा किया जा रहा है। कामयाबी के लिए, पढ़ाई में मन लगाने के लिए, दोस्ती के लिए, रोजी में तरक्की, लापता का पता लगाने और चोर की पहचान करने तक का यह दावा कर रहे हैं। अस्पताल के बाहर खड़े रेहड़ी-पटिरयों वालों से जब इनके बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह पिछले कुछ दिनों से ही यहां पर आकर बैठ रहे हैं और रोजाना एक या दो लोग इनके पास आ ही जाते हैं।
जैसा काम वैसी फीस:
काम भले ही इनका देसी हो लेकिन फीस इनकी डॉक्टरों वाली ही है। जो लोग इनके पास सिर्फ कंसल्टेशन यानी दिखाने के लिए आते हैं, उनसे 100 रुपये फीस ली जाती है। वहीं अगर आप इलाज करवाना चाहते हैं तो जैसी बीमारी, वैसी ही फीस ली जाती है। यह 500 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक इलाज करने के चार्ज करते हैं। ऐसे में गरीब इंसान जो सरकारी अस्पतालों की वेटिंग और निजी अस्पतालों के खर्च में मारा जाता है, वह यहां आकर इलाज करवाने के बारे में सोचने लगता है जो आगे चलकर नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।
हम कुछ नहीं कर सकते:
अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डा. किशोर सिंह यह काम अस्पताल की बाउंड्री के बाहर चल रहा है इसलिए अस्पताल की कोई जिम्मेदारी नहीं है क्योंकि अस्पताल के बाहर के ऐसे काम को एमसीडी देखती है लेकिन फिर भी मैं अपने स्तर पर इसका कुछ हल निकालने का प्रयास करुंगा।

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