अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस के मौके पर पंजाबी भाषा की उन्नति के लिए किया गया खास कार्यकर्म

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वाणी माँ के दूध के अमृत के समान कितनी मधुर, प्यारी, सच्ची, सुंदर, प्रासंगिक और प्रभावशाली है, इसका एहसास सच्ची प्रेममयी माँ की वाणी से होता है। मातृभाषा हमारे अस्तित्व, हमारे व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है। हर किसी की पहचान उसकी मातृभाषा से होती है, हमें अपनी विरासत को बचाने के लिए अपनी मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए।

दिल्ली की शान और पंजाबियों का मान सुन्नखी पंजाबनों ने  गुरु नानक पब्लिक स्कूल, राजौरी गार्डन में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया। कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू हुआ और तीन बजे समाप्त हुआ. यह सुन्दर प्रयास डा.अवनीत कौर भाटिया द्वारा इसे लगातार 7 वर्षों से मनाया जा रहा है।

पंजाब पंजाबी और पंजाबियत का मंच सुनखी पंजाबन ने कवि दरबार लघु नाटिका पेश की।
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को समर्पित कवि जसवन्त सिंह सेखवां , कवयित्री इंदरजीत कौर जी ने मातृभाषा का सम्मान करते हुए रुबाइयां और कविताएं प्रस्तुत कीं।

डॉ. अवनीत कौर भाटिया ने कहा कि प्रत्येक पंजाबी का कर्तव्य है कि वह मातृभाषा की सेवा में अपना योगदान दे। आइए आशा करें कि पंजाबी के विकास का सपना 21वीं सदी की आत्माओं तक पहुंचेगा और एक सपने के सच होने में बदल जाएगा।

सुन्नखी पंजाबन की प्रतिभाओं ने किसान आंदोलन के साथ-साथ मातृभाषा पंजाबी को बहुत ही सुंदर ढंग से समझाती हुई नाटिका प्रस्तुत की।
एक समय था जब पंजाबी न केवल भारत में बल्कि अन्य देशों में भी लोकप्रिय थे, लेकिन आज यह कहते हुए दुख हो रहा है कि पंजाबी अब पंजाबी नहीं रही।
कार्यक्रम को और खूबसूरत बनाने के लिए पंजाबी लोक गीत भी गाए गए.

मुख्य रूप से पंजाबी बोलना, पंजाबी पढ़ना और पंजाबी लिखना अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का लक्ष्य था।
इस कार्यक्रम में लगभग 60 से 70 पंजाबी भाषा बोलने वालों ने भाग लिया और कार्यक्रम को सफल बनाया।
मुख्य रूप से सभी विद्वानों ने अपनी-अपनी सोच के माध्यम से मातृभाषा पंजाबी में कविता और भाषण के साथ सुंदर शब्दों में अपने विचार व्यक्त किये।

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