कोविड-19 से लड़ाई में जान गंवाने वाले चिकित्सकों को शहीदों के समतुल्य मानें : आईएमए

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भारत चौहान नई दिल्ली, भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि कोविड-19 के कारण जान गंवाने वाले सभी चिकित्सकों को सैन्य बलों के शहीदों के समतुल्य माना जाए और उन पर आश्रित परिजनों को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां दी जाएं। देश में चिकित्सकों के सबसे बड़े संगठन ने पत्र में कहा कि वैश्विक महामारी से लड़ाई के दौरान जान गंवाने वाले सभी चिकित्सकों के परिवारों के लिए समावेशी राष्ट्रीय क्षतिपूर्ति ही उनके बलिदान के प्रति न्याय कर सकेगी।
आईएमए ने सरकारी डेटा के हवाले से कहा कि 87 हजार स्वास्थ्यकर्मी कोविड-19 से पीड़ित हुए तथा उनमें से 573 की मौत हो गई। हालांकि केंद्र ने इस संबंध में आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं। आईएमए ने 30 अगस्त को लिखे इस पत्र में कहा कि इन आंकड़ों ने देश भर में चिंता बढ़ा दी है। उसने कहा कि कुल 2,006 चिकित्सक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए और उनमें से 307 की मौत हो गई। इनमें से 188 चिकित्सक जनरल प्रैक्टिशनर थे जो सबसे पहले लोगों के संपर्क में आते हैं। इसमें कहा गया है कि चिकित्सकों पर वायरस का भार बहुत अधिक है और एक समुदाय के रूप में मामला मृत्यु दर (सीएफआर) भी अधिक है। आईएमए को यह कहने को मजबूर होना पड़ा है कि महामारी के दौरान वे अपने घर पर सुरक्षित रह सकते थे लेकिन उन्होंने देश की सेवा करने का निर्णय लिया। इस महामारी से लड़ाई में जिन चिकित्सकों ने जान बलिदान की है उन्हें भारतीय सैन्य बलों के समतुल्य मानते हुए उचित स्थान दिया जाए। उनके जीवनसाथी अथवा उन पर निर्भर परिजनों को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए।

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