स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिया मूलमंत्र: -स्वच्छता निवारक स्वास्थ्य का हिस्सा है, इससे जिका जैसे रोगों को दूर रखा जा सकता है -देश के कुछ राज्यों में में नये मामलों की सूचना मिली, -लोगों को इसके लक्षणों और उपायों से अवगत कराने की मुहीम तेज

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ज्ञान प्रकाश नई दिल्ली। राजस्थान के जयपुर जिले से, मच्छर से उत्पन्न होने वाले जिका वायरस रोग (जेडवीडी) के स्थानीय प्रकोप के लगभग 42 मामलों की सूचना मिली है। शहर में सात-सदस्यीय उच्चस्तरीय केंद्रीय समिति को नियुक्त किया गया है। जिका वायरस का कोई इलाज या टीका मौजूद नहीं है। पहली बार 64 साल पहले, एक सव्रेक्षण के दौरान पुणो में यह पाया गया था। सव्रेक्षण वायरस से उत्पन्न मस्तिष्क संक्रमण की जापानी और रूसी किस्मों की प्रतिरक्षा के संबंध में किया गया था। इस संक्रमण को एन्सीफेलाइटिस कहा जाता है। कंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरालॉजी के वैज्ञानिकों की एक टीम का भी गठन किया गया है। टीम क्षेत्रीय स्वास्थ केंद्रों और जिला अस्पतालों के डाक्टरों की मदद से संभावित वायरस क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। जो लोगों को इसके बचाव, रोकथाम व इलाज संबंधी तकनीकी जानकारियों भी दे रहे हैं।
क्या है जिका:
जिका वायरस (जेडआईकेवी) फ्लेविविरिडे वायरस परिवार का सदस्य है। यह दिन के समय सक्रियता वाले एइडिस मच्छरों, जैसे ए. इजिप्टी और ए. अल्बोपिक्टस द्वारा फैलता है। इस बीमारी के लक्षण डेंगू जैसे अन्य वायरल इन्फेक्शंस के समान होते हैं, जैसे कि बुखार, त्वचा पर चकत्ते, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और सिरदर्द। जिका वायरस संक्रमण, गिलेन-बैरे सिंड्रोम, न्यूरोपैथी और मायलाइटिस का भी एक ट्रिगर है, खासकर वयस्कों और बड़े बच्चों में। एक गर्भवती महिला का वायरस उसके भ्रूण में जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान संक्रमण माइक्रोसेफली जैसे गंभीर जन्म दोष पैदा कर सकता है।
स्वास्थ्य विभाग एलर्ट:
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदान ने कहा कि हम एलर्ट है हर स्थिति को गंभीरता निबटने के लिए तकनीकी टीमों को तैयार कर रहे हैं। इसके लिए हमनें जरूरी अत्याधुनिक नैदानिक और रोकथाम में इस्तेमाल की जाने वाली एम्यूनों दवाएं व उपकरण भी मंगाया है। जिका जैसी मच्छर से पैदा होने वाली बीमारी को रोकने के लिए स्वच्छता आवश्यक है। यह निवारक स्वास्थ्य का भी एक पहलू है। एस्पिरिन, एस्पिरिन युक्त उत्पाद, या अन्य ननस्टेरयड एंटी-इंफ्लैमेटरी ड्रग्स (एनसैड्स) जैसे कि इबुप्रोफेन लेने से बचें। अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और बंदरगाहों सहित समुदाय आधारित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है, ताकि फेब्रियल बीमारी के मामलों को ट्रैक किया जा सकता है। निवारक उपायों सहित बीमारी के बारे में जन-जागरूकता पर भी फोकस कर रहे हैं। जनता को आासन दिया जाना चाहिए कि भयभीत होने की जरूरत नहीं है।’
एक्सपर्ट की नजर में:
एचसीएफआई के अध्यक्ष पद्मश्री डा. केके अग्रवाल ने कहा, डेंगू और चिकनगुनिया की तरह, जिका एक वायरल संक्रमण है और एइड्सि मच्छरों के साथ यह एक कॉमन वेक्टर भी साझा करता है। इसकी इनक्यूबेशन या ऊष्मायन अवधि 3 से 14 दिन होती है। अधिकांश लोगों में लक्षण स्पष्ट नहीं होते या हल्के लक्षण होते हैं जैसे बुखार, रैश, कंजक्टिवाइटिस, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और सिरदर्द। लक्षण आम तौर पर 2-7 दिनों तक चलते हैं। ये नये मामले हमें बताते हैं कि इस बार, जिका वायरस तेजी से फैल रहा है। निकट भविष्य में इससे प्रभावित होने वाले अधिक मामले सामने आने की संभावना है। यह सभी के लिए एक बड़ी चिंता होनी चाहिए, खासतौर से सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए, क्योंकि भारत की आबादी विशाल है और यहां की जलवायु वेक्टर जनित बीमारियों के अनुकूल है।’

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