अब टीबी बैक्टीरिया को जड़ से खत्म करने के लिए टारगेटिड तैयारी! -राजधानी के 467 डाट्स केंद्रों की मदद से नये रोगियों की होगी घर बैठे पहचान – इस वर्ष का थीम है इट्स मी

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ज्ञानप्रकाश
नई दिल्ली , पोलियों वायरस के उन्मूलन के बाद बेशक अब दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य संस्था राज्य तपेदिक उन्मूलन समिति (एसटीबीसीसी) दिल्ली को अति खतरनाक फे फड़ों को बीमार कर देने वाली बैक्टिीरिया ट्यूब्रोक्लोसिस के उन्मूलन के लिए सख्त रणनीति तय की है। जिसके तहत 987 टीबी वर्कर्स की मदद से टीबी की पहचान करेंगे। इस कार्य में मदद करने के लिए उन्हें टीबी संभावित मरीजों का थूक, पेशाब व रक्त की जांच करने के लिए विशेष किस्म की डायग्नोसिक किट दी गई है। जिसकी खासियत यह है कि मरीज को घर पर ही टीबी हेल्थ वर्कर नमूनों को एकत्रित करेगा और उसे टीबी क्लीनिक सेंट्रल जांच केंद्र में जांच करेगा। यह सुविधा मुफ्त में प्रदान की जाएगी। टीबी वैक्टिीरिया पोजेटिव पाए जाने वाले मरीजों को स्टेट टीबी कंट्रोल कार्यालय में डाटा तैयार किया जाएगा। इसमें विशेषज्ञ टीम पोजिटिव पाए गए रोगियों को डाट्स केंद्र में बुलाया जाएगा। जरूरी अन्य कई जांचों के बाद उन्हें डाक्टरों की टीम यह सुनिश्ति करेगी कि टीबी बैक्टिीरिया का किस स्तर पर प्रभाव है। उसके हिसाब से औषधि खिलाई जाएगी।
चरण में मर्ज की होगी सटीक पहचान:
इस महती योजनों को अन्तिम रूप देने वाले स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने दावा किया कि इस योजना के तहत अचूक जांच की जाएगी। मरीजों के साथ ही दवाओं की खुराक सुनिश्ति होगी। जिसे मरीज को डाट्स कर्मी के सामने दवाएं लेनी होगी। यह तय है कि यह आदत उनकी दिनचर्या में शामिल होगी जिससे बैक्टिीरिया की सक्रियता को जड़ से खत्म किया जा सकेगा। अन्य कई विकसित देशों में इसी पण्राली पर सेवाएं प्रारंभ की गई थी जिसके शतप्रतिशत परिणाम मिले हैं।
सुविधाएं अपर्याप्त:
राजधानी के 467 डाट्स केंद्रों में टीबी की जांच की सुविधा आधी अधूरी है। इसमें थूक, रक्त की जांच की रेंडम जांच की सुविधाए एक तिहाई केंद्रों में नहीं है। इनकी स्थापना डोर टू डोर पंजीकृत क्षय रोगियों को अपने सामने ही दवा खिलाने, उनकी नियमित जांच करने के उद्देश्य से की गई थी। इसके पीछ स्वास्थ्य विभाग मांग के अनुरूप अनुदान नहीं दिया जाना बताया गया। दिल्ली स्टेट टीबी उन्मूलन प्रोग्राम चाहते हुए भी इन डाट्स केंद्रों में पहुंचने वाले मरीजों को समय पर दवाएं और जरूरी जांच नहीं कर पा रहे हैं। टीबी रोग के इलाज के लिए फिलहाल दिल्ली में राजनबाबू तपेदिक रोग संस्थान, किंग्जवे कैंप, लाला रामस्वरूप क्षय रोग संस्थान, महरौली, गुलाबी बाग पॉलीक्लीनिक समेत 16 पॉली क्लीनिक्स है, जहां 40 फीसद डाक्टरों के पद रिक्त है, यही हालत पैरामेडिकल स्टाफ के हैं। आगामी 24 मार्च को वि टीबी दिवस है, इस वर्ष का थी है इट्स टाइम।
टीबी:
टीबी संक्रमणों में, शरीर द्वारा तनाव प्रतिक्रियाएं बिगड़े हुए ग्लूकोज टॉलरेंस के परिणामस्वरूप होती हैं, जो मधुमेह के लिए एक जोखिम कारक है। टीबी की दवाएं (जैसे कि रिफैम्पिसिन) भी ग्लूकोज नियंतण्रको और अधिक कठिन बना देती हैं। मधुमेह वाले लोगों को अगर दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार, रात को पसीना और वजन कम होने की समस्या रहती है, तो उपचार कराना चाहिए।
स्थिति में होगा सुधार:
स्वास्थ्य सचिव संजीव खिरवार ने कहा कि कुछ क्लीनिकों में डाक्टरों की कमी है, उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ डाक्टर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से पद रिक्त हुए हैं, जिन्हें जल्द ही भरा जाएगा। स्वच्छता व्यवस्था के लिए निजी एजेंसी को जिम्मेदारी दी जाएगी।
सुझाव:
टीबी एक नोटीफाइ करने लायक बीमारी है और इसलिए, डीटीआर यानी डायगोज, ट्रीट एंड रिपोर्ट वाली एप्रोच को अपनाना चाहिए। इसकी जल्दी पहचान होनी चाहिए और थूक का परीक्षण करके प्रभावी उपचार किया जाना चाहिए। साथ ही इसकी रिपोट करना अनिवार्य है।

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