अध्यात्म ही हमारे शरीर, मन, बुद्धि और संस्कारो को स्वस्थ और शक्तिशाली बनाता है: मेघवाल -विज्ञान, आध्यात्म, शिक्षा और पर्यावरण विषय पर शिखर सम्मेलन

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ज्ञान प्रकाश नई दिल्ली, जो सूक्ष्म शरीर आत्मा और भौतिक शरीर में समन्वय स्थापित कर लेता है वह प्रकृति से जुड़ जाता है। क्योंकि यह शरीर भी उन पांच तत्वों से बना है जो प्रकृति के तत्व है। आध्यात्मिकता यानी आत्मा की शक्ति जो कि संकल्प तरंगे है वह किसी दूसरे तक पहुंचना विज्ञान है। यह बात जल संसाधन एवं पार्लियमेंट्री अफेयर्स केन्द्रीय राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल मुख्य अतिथि के रूप में ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईरीय विविद्यालय द्वारा वन एवं पर्यावरण तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ मिलकर आयोजित विज्ञान, आध्यात्म, शिक्षा और पर्यावरण विषय पर वैिक शिखर सम्मेलन में रविवार स्थानीय तालकटोरा सभागार में कही।
उन्होंने कहा कि मैक्सिको के अर्थशात्री एरनेस्टो कैस्टलनोस ने कहा कि भ्रष्टाचार चारों ओर फैल रहा है इसके लिए अपने अन्दर परिवर्तन की शक्ति लानी होगी जिससे समाज में परिवर्तन कर सके। हम मूल्यों के बारे में पढ़ते है लेकिन उन्हें अपने जीवन में लाकर उदाहरण रूप बनना होगा। हमें विज्ञान, आध्यात्म, शिक्षा और पर्यावरण सभी में ऐसे ही नेतृत्व की आवश्यकता है जिनकी सोचने, बोलने और करने में समानता हो।
कंद्रीय विज्ञान और पर्यावरण मंत्री डा. हषर्वर्धन ने कहा कि मानवता की कल्याण के लिए विज्ञान और अध्यात्मिकता साथ-साथ काम करे। अध्यात्म और विज्ञान आपस में परिपूरक है, विरोधी नहीं। कोयला व खान मामलों के केंद्रीय राज्यमंत्री हरिभाई चौधरी ने केंद्र सरकार की ओर से ब्रह्माकुमारी संस्था को स्वच्छता, योगा, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं जैसे कायरे में सरकार की मदद करने के धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे सेमिनार व्यक्ति व समाज में शिक्षा देते है और शिक्षा से उन्नित होती है। इस सम्मेलन में 56 देशों से करीब 4 हजार से अधिक अनुयायी शिरकत कर रहे हैं। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके अनसुईया ने कहा कि बाहर के धुंये को, प्रदुषण को नियंतण्रकरने के लिए तो कानून बनते है लेकिन मानव के अन्दर की नकारात्मकता और काम, क्रोध, लोभ, मोह, अंहकार विकारों रूपी धुंये और प्रदुषण को आध्यात्मिकता और राजयोग से ही नियंत्रित किया जा सकता है। डॉन्ट ड्रिन्क एण्ड ड्राईव होता है लेकिन ड्रिन्क ही न करें यह जरूरी है।

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