लक्षण बदल रहा है अब कोरोना! -छींक, फीवर, बलगम नहीं बल्कि कोविड टोज यानी पैरों की अंगुलियों में घाव के साथ सूजन के रूप में

डाक्टर है कन्फ्यूज्ड किस लक्षण को सही माना जाए -एम्स जेपीएन सेंटर ने जारी की वारियर्स को नई एडवाइजरी, स्क्रीनिंग में शरीर में रेसिस, पैरों में सूजन और जख्म को भी करें फोकस

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ज्ञानप्रकाश नई दिल्ली , एम्स जेपीएन सेंटर में उपचाराधीन करीब 234 कोरोना वायरस संक्रमितों में से दो फीसद ऐसे पाए गए हैं कि उनमें संक्रमित होने के बाद खांसी, जुकाम, बुखार नहीं बल्कि पैरों में घाव यानी कोविड टोज के रूप में दिख रहा है। हालांकि अब तक ऐसे मरीजों की पुष्टि अमरीका और इटली के कुछ मरीजों में हो चुकी है। एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि शुरु आत में ही जब चीन में इसका पता चला था तो काफी दिनों तक लगा कि यह संक्रामक रोग नहीं है, जो एक शख्स से दूसरे को फैले। मरीजों में पैर के अंगूठों में ये नए लक्षण दिख रहे हैं। इन लक्षणों को भी अब हमने कोविड-19 वैरियर्स के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। जिसके तहत अन्य लक्षणों की तरह ही उनके हाथों, पैरो के साथ ही शरीर के विभिन्न अंगों पर रेशिश आदि तो नहीं की भी स्क्रीनिंग करने की सलाह दी है।
सबसे पहले:
सबसे पहले मार्च में ये लक्षण इटली में एक 13 साल के बच्चे में दिखा था। उसके पैर में गहरे रंग का घाव दिखा। शुरु आत में तो माना गया कि उसे मकड़ी ने काटा होगा, क्योंकि निशान काफी हद तक वैसा ही था, लेकिन बाद में कोरोना के और भी मरीजों में ये लक्षण दिखने लगे। अब ये लक्षण अमेरिका में कई कोरोना मरीजों में दिखने लगे हैं, जिसकी वजह से वहां भी डॉक्टर इस पर चर्चा करने लगे हैं। अब कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की पहचान में पैरों के लक्षण भी देखे जा रहे हैं, खासकर बच्चों और जवान लोगों में।
कोविड टोज़:
इस लक्षण को कोविड टोज़ नाम दिया गया है। ये लक्षण काफी हद तक उन लोगों में दिखने वाले लक्षणों जैसे हैं जो बेहद ठंडे इलाकों में रहते हैं। सर्दियों में उनके पैरों में ऐसे ही निशान दिखते हैं, जिनमें जलन होती है। इटली में ऐसे बच्चों में कोरोना वायरस के और कोई लक्षण नहीं दिखे थे। इस पर बहुत सारे त्वचा रोग विशेषज्ञ काफी दिनों से विचार-विमर्श कर रहे हैं।
कॉमन कोविड लक्षण:
कोरोना के मरीज में सिर्फ कफ, बुखार, गला सूखना, थकान महसूस होना, खांसी आना और सांस लेने में तकलीफ के ही लक्षण नहीं दिखते, बल्कि कुछ मरीजों में अचानक कुछ भी ना महकना, टेस्ट गायब हो जाना और आंखें गुलाबी होने जैसे लक्षण भी दिख रहे हैं।
दिल्ली सुधार मामले में नंबर वन:
इस बीच स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में अब तक आए कुल मामलों में से 34 फीसद ठीक हो चुके हैं। अन्य की हालत में तेजी से सुधार दर्ज किया जा रहा है। जिनकी मौत हुई है उनकी उम्र 60 के पार है, वे किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त पाए गए। दिल्ली में 65 फीसद मरीज 50 साल की कम उम्र के हैं जिन्हें फिलहाल कोई अन्य घातक बीमारी नहीं है।

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