तैयारियां पूर्ण, दस दिवसीय गणोशोत्सव आज से -बाजार में 10 रुपये से लेकर एक लाख की मूर्तियां खरीदनें में श्रद्धालुओं ने ली दिलचस्पी

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ज्ञान प्रकाश नई दिल्ली , गणोश चतुर्थी हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है और इसे पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को श्री गणोश चतुर्थी के नाम से मनाया जाता है। दस दिन तक चलने वाली गणोश चतुर्थी की शुरु आत 2 सिंतबर से होगी, 10वें दिन के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन ये उत्सव पूर्ण होगा। ऐसा माना जाता है कि गणपति जी का जन्म मध्यकाल में हुआ था, इसलिए उनकी स्थापना इसी काल में होनी चाहिए। अगर इस दिन की पूजा सही समय और मुहूर्त पर की जाए तो हर मनोकामना की पूर्ति होती है। राजधानी के प्रमुख बाजारों में रविवार को उत्सव की पूर्व संध्या पर खासी रौनक थी, लोग गणोश जी की छोटी से लेकर विशालकाय प्रतिमाओं की खरीददारी करने में व्यस्त रहे।
मूर्ति स्थापन विधि:
गणोश जी की मूर्ति लेने जाएं तो हमेशा नए और साफ सुथरे कपड़े ही पहन कर जाएं। मूर्ति खरीदते समय यह ध्यान दें कि उनकी सूंड बाई ओर मुड़ी हुई हो। बाई ओर मुड़ी हुई सूंड वाली मूर्ति सबसे शुभ मानी जाती है। घर में मूर्ति ला कर उसे चांदी की थाली में स्वास्तिक बनाकर रखें। घर में विराजमान करें तो मंगलगान करें, कीर्तन करें। लड्डू का भोग भी लगाएं। इसके बाद रोज सुबह -शाम उनकी आरती करें और मोदक का भोग लगाएं।
पूजन:
गणपति को विराजमान करने के लिये पहले कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। चार हल्दी की बंद लगाएं। एक मुट्ठी अक्षत् रखें। इस पर छोटा बाजोट, चौकी या पटरा रखें। लाल, केसरिया या पीले वस्त्र को उस पर बिछाएं। रंगोली, फूल, आम के पत्ते और अन्य सामग्री से स्थान को सजाएं। तांबे का कलश पानी भर कर, आम के पत्ते और नारियल के साथ सजाएं। यह तैयारी गणोश उत्सव के पहले कर लें।
गणपति बप्पा मोरया:
2 सितंबर से 12 सितंबर तक पूर्वी दिल्ली के डीडीए मिनी स्टेडियम, बैंक एन्क्लेव लक्ष्मीनगर में श्री गणोश सेवा मंडल सबसे बड़े गणोश महोत्सव में से एक दिल्ली का महाराजा के नाम से मशहूर 18वें गणोश महोत्सव आयोजित कर रहे हैं। मंडल के संस्थापक अध्यक्ष महेंद्र लड्डा ने कहा कि इस वर्ष 18वां गणोशोत्सव में हम 12 फुट का गणोश भगवान की मूर्ति का निर्माण किया है। जो पर्यावरण अनुकूल है। हम किसी भी रसायन का उपयोग नहीं करेंगे, इसे बनाने में हम केवल फाइबर का प्रयोग कर रहे हैं एवं उसमें प्रयोग किया जाने वाला रंग भी पूरी तरह से इको फ्रेंडली है। इस बार गणोश भगवान के हाथों पर जल ही जीवन है का भी एक सन्देश होगा। और इस तरह इस बार दिल्ली का महाराजा लोगों को जल ही जीवन है। का सन्देश देते नजर आयेंगे। पंडाल त्रिपति बाला जी के रूप में आकार दिया गया है। मंडल के अध्यक्ष सचिन गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष गणोश प्रतिमा की स्थापना विशाल शोभा यात्रा के उपरांत 02 सितम्बर को श्री श्री 1008 संत श्री कृष्णा स्वामी महामंडलेर महाराज करेंगे। बाजार में 10 रूपये से लेकर एक लाख तक की मूर्तियां खरीदने के लिए आतुर दिखे।

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