प्रसूति रोग विशेषज्ञों की नजर: करोड़ों लोगों को संतान सुख भी दे सकता है आयुष्मान भारत! -अब तक आईवीएफ तकनीक पैकेज में नहीं है शामिल -एम्स सहित देश भर के अस्पतालों में हो रहे आईवीएफ -चिकित्सा की इस विधा पर कोई गाइडलाइन भी नहीं है लागू

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ज्ञान प्रकाश नई दिल्ली , बेशक प्रधानमंत्री जनआरोग्य परियोजना (आयुष्मान भारत) के तहत महज चंद ही माह में करीब 8 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त उपचार मिल चुका हो लेकिन ये योजना देश के उन करोड़ों लोगों को भी सुख दे सकती है। जिन्हें संतान न होने के कारण सामाजिक और मानिसक स्तर पर परेशान होना पड़ रहा है। अभी तक करीब 1300 से ज्यादा स्वास्थ्य पैकेज आयुष्मान भारत का हिस्सा हैं लेकिन आईवीएफ चिकित्सा को इसमें शामिल नहीं किया गया है। जबकि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से लेकर देशभर के अस्पतालों में हर वर्ष हजारों टेस्ट ट्यूब बेबी जन्म ले रहे हैं। अकेले एम्स में ही करीब 2 हजार से ज्यादा शिशु आईवीएफ तकनीक से जन्म ले रहे हैं।
डाक्टर की नजर में:
एम्स की पूर्व प्रसूति विभाग के अध्यक्ष डा. सुचेता कृपलानी का कहना है कि बांझपन तेजी से भारतीयों में बढ़ रहा है। जिस तरह हार्टए न्यूरो और कैंसर के लिए उपचार चाहिए। ठीक उसी तरह लोगों को बांझपन का भी इलाज मिलना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्रालय भी आगामी बजट में इसे स्थान दे सकता है। नोवा आईवीएफ विशेषज्ञ डा. पारु ल कटियार का कहना है कि आईवीएफ पिछले पांच वर्षो में काफी लोगों तक पहुंचा है। इसलिए आयुष्मान भारत सहित तमाम बीमा कंपनियों को भी इसे शामिल करना चाहिए। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को संतान प्राप्ति का सुख मिल सके।अभी तक सामने आई रिसर्च के अनुसार देश में हर चौथे परिवार में कोई न कोई बांझपन से जूझ रहा है। दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में ये स्थिति और भी ज्यादा भयावह है। धूमपानए वायु प्रदूषण और असंतुलित जीवनशैली युवाओं को बांझपन का शिकार बना रही है। भविष्य बनाने की राह में जो लोग देरी से शादी कर रहे हैंए उन्हें भी इस तकनीक से होकर गुजरना पड़ रहा है। चूंकि राष्टड्ढ्रीय स्तर पर अब तक सरकार ने आईवीएफ को लेकर गाइडलाइन नहीं बनाई हैए जिसके चलते इस चिकित्सा को लेकर गलत उपचार भी किए जा रहे हैं। डॉण् पारु ल ने ये भी बताया कि जिन लोगों में बार बार आईवीएफ फेल हो रहा हैए उन्हें भी कुछ मेडिकल जांच के बाद संतान का सुख मिल सकता है।
बढ़ सकते हैं आयुष्मान की राशि:
अभी तक आयुष्मान भारत के तहत 1300 से ज्यादा पैकेज को शामिल किया है। अगले माह होने जा रही नेशनल हेल्थ एजेंसी की बैठक में पैकेज को बढ़ाने पर चर्चा होगी। सूत्रों की मानें तो अबकी बार आईवीएफ सहित अन्य कई तरह के रोगों का उपचार भी इस योजना में शामिल किया जा सकता है।

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