लॉकडाउन दुष्प्रभाव: घंटों की ऑनलाइन स्टडी से आंखें हो रही हैं खराब -मायोपिया, भेंगापन, आंखों में तनाव, ड्राई आई जैसी बच्चों में तेजी से दर्ज की जा रही समस्याएं

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ज्ञानप्रकाश नई दिल्ली, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डा. राजेंद्र प्रसाद नेत्र केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डा. शक्ति कुमार गुप्ता के अनुसार कोरोना वायरस के चलते स्कूल, ट्यूशन, कॉलेज सहित सभी शिक्षण संस्थान बंद हैं। ऐसे में ऑनलाइन ही पढ़ाई की जा रही है। खासकर स्कूल स्टूडेंट्स को 3 से 4 घंटे तक लगातार ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है जिसका नतीजा यह हो रहा है कि बच्चे मायोपिया जैसी समस्या तक पहुंच रहे हैं। साथ ही भेंगापन, आंखों में तनाव, ड्राई आई जैसी समस्या भी बच्चों में देखने को मिल रही है।
आरपी सेंटर के प्रो. टीएस टिटियाल कहते हैं कि पिछले दो महीने से स्कूल बंद हैं। ऐसे में बच्चों को लगातार 4 से 5 घंटे तक ऑनलाइन पढ़ाई स्कूल की तरफ से करवाई जा रही है, जिसका बच्चों की आंखों में पर काफी नकारात्मक असर पड़ रहा है। हालांकि स्थिति को देखते हुए बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है, क्योंकि दूसरा कोई ऑप्शन फिलहाल नहीं है लेकिन इससे बच्चों को मायोपिया, भेंगापन, ड्राई आई जैसी समस्या होने लगी है।
लगातार ऑनलाइन पढ़ाई करने के बाद फिर बच्चे माइंड फ्रेश करने के लिए मोबाइल-लैपटॉप में गेम्स खेलते हैं, गाने सुनते हैं और मूवीज देखते हैं। यह सिलसिला भी कई घंटों तक चलता रहता है। लॉकडाउन की वजह से बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। जहां पहले वह दिन में 4 घंटे स्क्रीन का इस्तेमाल करते थे, अब वह समय बढ़कर 7 से 8 घंटे पर पहुंच गया है।
रोजाना आते हैं पैरंट्स के फोन:
इंडियन आप्थालमालॉजी सोससयटी के अध्यक्ष एवं आई7 के निदेशक डा. संजय चौधरी का कहना है कि उनके पास रोजाना काफी पैरंट्स टेली कंसल्टेशन ले रहे हैं और कुछ बच्चों को अस्पताल लेकर आ रहे हैं। बच्चों की आंखों में दर्द होना, धुंधला दिखाई देना, आंखों से पानी निकलते रहना, कई बार आंखों में लालिमा हो जाना, बच्चे को चश्मा लगा हुआ है लेकिन अब उसमें से भी धुंधला दिखने लगा है, आंखों में सूजन आना आदि सवाल पैंरंट्स पूछ रहे हैं। पैरंट्स बताते हैं कि उनके बच्चों को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या स्क्रीन टाइम बढ़ने से ही आती है।
मायोपिया:
मायोपिया में हमें पास की चीजें तो साफ दिखती हैं, लेकिन दूर की चीजें साफ नहीं दिखाई देती हैं। यदि कोई चीज हमसे 2 मीटर या 6 मीटर की दूरी पर है, तो वह हमें साफ दिखाई नहीं देगी। वह चीजें धुंधली दिखाई देती हैं।
13 प्रतिशत स्टूडेंट्स मायोपिया से ग्रस्त:
एम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में करीब 13 प्रतिशत स्कूली स्टूडेंट्स मायोपिया से ग्रस्त हैं। वहीं अमेरिका में 30 प्रतिशत बच्चे इसके शिकार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2050 में दुनिया के लगभग 5 हजार लोग मायोपिया के शिकार होंगे। एशिया के देशों में इसका अधिक खतरा है।
ऐसे बचें:
-ऐसे बचा सकते हैं इन समस्याओं से
-बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित किया जाए
-यदि ऑनलाइन स्टडी चल रही है तो हर 20 मिनट के बाद 20 सेकंड के लिए आंखों को आराम दें।
-डॉक्टर के बताए अनुसार आंखों को घुमाने आदि जैसी एक्सरसाइज करते रहें
-जब बच्चे स्क्रीन का इस्तेमाल कर रहे हों तो पलकें झपकाना ना भूलें
-स्क्रीन का इस्तेमाल करते वक्त उससे जितना दूर हो सके, उतना दूर बैठें

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