फिल्म मेन्टल है क्या के विरोध में आई डाक्टर बिरादरी -आईएमए, इंडियन साइकाएट्रिक सोसायटी -मेंटल है क्या फिल्म मानिसक रोगियों के लिए हंसी का पात्र

0
297

ज्ञान प्रकाश नई दिल्ली , देशभर में एलोपैथ डाक्टरों के शीषर्स्थ संघ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) एवं इंडियन साइकाएट्रिक सोसायटी ने आने वाली फिल्म मेंटल है क्या शीषर्क में मेंटल नामक शब्द पर आपत्ति जताई है। दोनों संगठनों ने फिल्म के टाइटल और पोस्टर की र्भत्सना करते हुए फिल्म निर्माता से इन्हें वापस लेने की अपील की है। इस आश्य के एक पत्र केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को लिखा है जिसमें यह अपील की है कि टाइटल ही नहीं फिल्म के कांटेंट (कहानी और चित्रण) में भी सुधार करें अगर वह मानिसक रोग से जूझ रहे नागरिकों का अपमान करने वाला या खतरों से नाहक खेलने की प्रवृत्ति को बढ़ाने वाला है। रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की आजादी का तर्क आपको इस बात की छूट नहीं देता कि आप बीमार लोगों और उनके परिजनों को अपमानित करें और युवाओं को जीवन खतरे में डालनेके लिए प्रेरित करें।
आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. शांतनु सेन ने आईटीओ स्थित मुख्यालय में आयोजित प्रेसकांफ्रेंस में कहा कि टाइटल में जो मेंटल नामक शब्ध है और जो कहने का अन्दाज है वह मानिसक रोग की परेशानियां झेल रहे लोगों की हंसी उड़ाता है और उनका अपमान करता है। इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के अध्यक्ष डा.मृगेश वैष्णव का कहना है कि मानव-अधिकारों के प्रति सजगता के इस दौर में मानिसक रूप से परेशान लोगों के अधिकारों की भी रक्षा होनी चाहिए। अब तो हम पूरे व्यक्ति को बीमार बताने वाले टर्म ‘मानिसक रोगी’ की जगह ‘मानिसक रोग से ग्रस्त व्यक्ति’ कहने लगे हैं क्योंकि मनोरोग व्यक्ति को पूरी तरह खारिज नहीं करते। मगर इस फिल्म का टाइटल व्यक्ति को पूरी तरह खारिज करता है- यह अनैतिक और अमानवीय ही नहीं अवैधानिक भी है।
तर्क:
कई शोध यह बताते हैं भारत सहित दुनिया के सारे देश मानिसक रोगों से जुड़े कलंक (स्टिग्मा) से आज भी जूझ रहे हैं। विशेषज्ञ लोगों को लगातार समझा रहे कि दुनिया में कोई मेंटल या पागल नहीं। वे सब किसी न किसी रोग से ग्रस्त हैं और यह न अपराध है न अभिशाप। इन रोगों का इलाज संभव है। कुछ बीमारियां क्रॉनिक होती हैं जो कि नियमित दवाओं और अन्य प्रकार की देखभाल से नियंत्रित रहती हैं। स्मरण रहे कि राइट ऑफ परसंस विथ डिसएबिलिटी ऐक्ट का सेक्शन 92 कहता है कि किसी भी प्रकार की विकलांगता/दिव्यांगता से ग्रस्त व्यक्ति को धमकाना या खुले आम शर्मिंंदा करना दंडनीय अपराध है और इसके लिए आर्थिक दंड सहित छ: महीने से पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here