होम्योपैथी पद्धति में है असरदार इलाज: कांत -मंडोली कारगार में बंदियों के स्वास्थ्य की जांच

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ज्ञान प्रकाश नई दिल्ली , स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन बसता है। इसी सूक्ति वाक्य के अनुपालन के लिए तिहाड कारागार (टीजेएस) प्रशासन समय -समय पर बंदियों की शारीरिक जांज के लिए चिकित्सा शिविरों का आयोजन कराता रहता है। टीजेएस के कारागार महानिदेशक संदीप गोयल अनुशंसा से कारागार संख्या 11 मंडोली के बंदियों को होमियोपैथी चिकित्सा शिविर के जरिए स्वास्थ्य की जांच की गई।
कारागार अधीक्षक आदेर कांत ने एक दिवसीय शिविर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि होमियोपैथी चिकित्सा 19वीं सदी में भारत में प्रचलित हुई। जिसमें रोग के लक्षणों केअनुरूप दवा देने का प्रचलन प्रारंभ हुआ। इस विधा में मरीज का इलाज अर्क संप्रेषण की हुई एवं द्रव्य के रूप में दवाओं से किया जाता है। शिविर का आयोजन चिकित्सा प्रकोष्ठ भारतीय होमियोपैथी पैनल के प्रसिद्ध डाक्टरों ने किया। शिविर में आये 10 डाक्टरों की टीम ने लगभग 160 बंदियों की जांच कर उनको दवायें प्रदान की। आदेरकान्त ने शिविर में शामिल डाक्टरों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। डाक्टरों ने कारागार की सफाई, बंदियों का अनुशासन व भोजन की गुणवत्ता को सराहा एवं जल्द ही चिकित्सा शिविर लगाने का वादा किया। कार्यक्रम में मुख्यरूप से कारागार के उप अधीक्षक रामपाल एवं रिषी कुमार, सह अधीक्षक राजकुमार एवं मनोज कुमार के अलावा दानिस कल्याण अधिकारी एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। सभी बंदियों ने कार्यक्रम की कोटिकोटि प्रशंसा की एवं चिकित्सा शिविर के आयोजन के लिए कारागार अधीक्षक आदेरकान्त का दिल से धन्यवाद किया।

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