दिल के स्वास्थ्य का मूल्यांकन अब सीसीटी से बिना चीड़ फाड़ के होगा संभव! – कार्डियक कम्प्यूटराइज्ड एक्सेल टोमोग्राफी तकनीक से होगी जांच

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ज्ञानप्रकाश
नई दिल्ली, अब दिल के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए कार्डियक मैगनेटिक रिसोनेंस इमेजिंग (सीएमआरआई) और कार्डियक कम्प्यूटराइज्ड एक्सेल टोमोग्राफी (सीसीटी स्कैन) की जांच सहजता से उपलब्ध होगी। इसे हृदय रोग के विस्तृत मूल्यांकन के लिए एमआर में इस्तेमाल की जाने वाली बिना चीड़ फाड़ की तकनीक कहते हैं। यह जांच सिर्फ एक से डेढ़ घंटे में की जाती है। एम्स में यह सुविधा पाने के लिए मरीजों को एक से डेढ साल तक की वेटिंग है।
इस तकनीक के शुरूआत यहां गंगाराम अस्पताल में करने वाले यूएसए के ओहियो स्थित क्लीलैंड क्लिनिक में रेडियोलॉजी एंड कार्डियोवास्कुलर इमेजिंग यूनिट के हेड प्रो. स्कॉट फ्लेम ने रविवार को राष्ट्रीय सहार को बताया कि यह एक अत्यधिक विशिष्ट जांच है जिसे आधुनिक स्कैनर की मदद से मांसपेशियों की संरचना और कार्य के बारे में जानकारी प्रदान करता है। इससे यह पता चलता है कि प्रत्येक वाल्व और प्रत्येक धमनियों में कितना रक्त प्रवाहित होता है। हार्ट अटैक के बाद, यह जानकारी दे सकता है कि मांसपेशियों को कितना नुकसान हुआ है। सर्जरी की जानी चाहिए (विएबिलिटी)। यह मांसपेशियों की सूजन (मायोकार्डिटिस) के साथ-साथ मांसपेशियों के बारे में जानकारी देता है। किसी व्यक्ति को किस उम्र तक हृदयघात होने की संभावनाएं हो सकती है। प्रो. फ्लेम राजधानी में चल रहे तीन दिवसीय इमेजिंग टुडे अपडेट: कार्डियक इमेजिंग शैक्षिक कार्यक्रम के सत्र में शिरकत कर रहे हैं।
खास बातें:
इस विधि से धमनी की रु कावट के अलावा, ऐसे रोग हो सकते हैं जो हृदय के वाल्व या मांसपेशियों को प्रभावित करते हैं और कुछ मामलों में अनुवांशकीय जन्मजात शिशुओं में हृदय दोष पैदा होते हैं, का पता लगाने में सक्षम है। अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ रेडियोलॉजी (एमआर एंड सीटी) के प्रमुख डा. टीबीएस बक्सी के अनुसार इमेजिंग मॉडेलिटी जैसे कि मल्टी-डिटेक्टर सीटी, दिल की धमनियों को हाथ की नस में एक छोटी सी सुई लगाकर देखने का एक तरीका है, जिससे हृदय ब्लॉकेज और बच्चों के फेफड़ों में रूकावट का पता चलता है। एमआरआई एक और ऐसा इमेजिंग मोडेलिटी है जो हृदय की मांसपेशियों की स्थिति और साथ ही दिल की धड़कन का भी पता लगाता है।
हृदय रोग:
हृदय रोग (सीवीडी) हृदय और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से संबंधित रोग हैं जो अब देश में मृत्यु का प्रमुख कारण बन गया हैं। चार में से एक व्यक्ति इन बीमारियों के कारण मर जाते है। 80 फीसद मौतों के लिए हार्ट अटैक और स्ट्रोक प्रमुख कारण हैं। रक्त की आपूर्ति में रु कावट के कारण दिल का दौरा पड़ता है।
यह भी:
कुछ साल पहले तक रक्त वाहिकाओं के रु कावट को जांचने का एकमात्र तरीका रोगी की रक्त वाहिकाओं को पंचर करके और एक कैथेटर में डालकर हृदय तक रक्त की आपूर्ति की जांच की जाती थी। यह इनवेसिव तरीका न केवल समय ले रहा था, बल्कि रोगियों के लिए भी कष्टदायक था।

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