दिल्ली पत्रिका ने किया बड़ा खुलासा तम्बाकू, पान मसाला, गुटखा बिक्री पर पाबंदी बेमानी ! एक से 10 रुपये की पुड़िया में बिक रहा है जहर इनके पैकेट पर नहीं छपी थी कीमत और अनिवार्य चेतावनी हो सकती है एक साल की जेल

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ज्ञानप्रकाश के साथ भारत चौहान नई दिल्ली,यहां वहां इधर उधर गली मोहल्ले से लेकर पॉश कालोनियों में बिकने वाले तम्बाकू निर्मित उत्पाद घटिया बेचे जा रहे हैं। उत्पादन करने वाली कंपनियां इरादतन नशा करने वालों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ताज्जुब यह है कि सिगरेट, बीड़ी, पान मसाला, गुटका बिक्री पर न्यायालय ने पाबंदी लगाई है। बावजूद इसके तम्बाकू उत्पादन करने वाली कंपनियां नियमों की अनदेखी कर रही है। इतना ही नहीं, बाजार में बिकने वाले उत्पाद नकली है, घटिया है, उन पर न तो एक्सपायरी डेट लिखी जा रही है, न ही मूल्य। धूम्रपान करने वालों की सेहत बिगड़ रही है। जिनकी कीमत एक रुपये है जबकि सिगरेट के पैकेट की कीमत 200 रुपये से शुरु होकर हजार रुपये से अधिक है।
ऐसे हुआ खुलासा:
दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मध्य दिल्ली के नया बांस इलाके से दस लाख रु पए के कीमत की अवैध विदेशी सिगरेट पकड़ने का दावा किया है। मध्य दिल्ली पुलिस के साथ किए एक साझा छापेमारी के दौरान बरामद इन सिगरेटों के बारे में स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नियमों के अनुसार इनके पैकेट के 85 प्रतिशत हिस्से पर अनिवार्यचेतावनी नहीं छपी थी। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डा. एसके अरोड़ा के अनुसार विभाग को मिली एक सूचना के आधार पर नया बांस इलाके में तीन घंटे की छापेमारी की गई। यहां बड़ी मात्रा में अवैध सिगरेट के कार्टून मिले। ये सभी विदेशी ब्रांड के थे, जिनके पैकेट के 85 प्रतिशत हिस्से पर छपने वाली अनिवार्यचेतावनी नहीं थी और इन पर कीमत भी नहीं छपा था। इन सिगरेटों पर टैक्स की चोरी भी की जाती है। इसके खिलाफ कोटपा (2003) की धारा सात और बीस के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इसके तहत इसके विक्रेता और डिस्ट्रब्यूटर को एक साल की सजा या एक हजार रु पए का जुर्माना या दोनों ही करने की तैयारी में हैं।
यह भी:
स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि बीते तीन माह के दौरान 345 ऐसे कंपनियों के रैपर जब्त किए गए हैं, जब्त किए गए उत्पादों और उसकी अवयवों की जांच के लिए केंद्रीयकृत प्रयोगशाला में भेजा गया है। अधिकारी ने कहा कि इसमें से 56 फीसद में मिलावट पाई गई है। 44 फीसद ऐसे रेपर जब्त किए गए हैं जिनके रैपर की कीमत व उसके अंदर कौन कौन से इनग्रिडिएंट्स लिखे है वह तक नहीं छापा गया है। उसकी मियादी तिथि या तो लिखी ही नहीं है और जिन कुछ पर अंकित भी है तो वे ठीक से पढ़ने लायक नहीं है।
उपभोक्ताओं को जागरुक करने की रणनीति:
अतिरिक्त स्वास्थ्य सचिव एसीसीएल दास ने कहा कि यह पहली बार है जब विभाग ने इस तरह की कार्रवाई की है। विभाग का काम इसके दुष्प्रभाव के खिलाफ लोगों को जागरूक करना है। वहीं इस तरह के रेड करने का काम इंफरेसमेंट एजेंसियों का है, लेकिन बिते वर्षो में लगातार पत्र लिखने के बाद इन एजेंसियों ने कुछ नहीं किया। इसलिए उन्हें खुद आगे आकर इस तरह की छापेमारी करनी पड़ रही है।

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