DTC के खेमे में बसें बढ़ाये दिल्ली सरकार -मनोज तिवारी

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भारत चौहान नई दिल्ली,दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि अरविन्द केजरीवाल सरकार की घोर लापरवाही और पूर्ववर्ती श्रीमती शीला दीक्षित सरकार की अनियोजित कार्यशैली के कारण दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ दिल्ली परिवहन निगम, ठप्प होने के कगार पर है जिसके फलस्वरूप दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अगले दो से तीन वर्षों के बीच चरमरा जायेगी।
तिवारी ने कहा है कि इसे लापरवाही कहें या केजरीवाल सरकार की निष्क्रियता, बसें नहीं खरीदी जा रहीं और डी.टी.सी. के बेड़े में उन बसों को हटाये जाने के बाद जिनका जीवनकाल पूरा हो गया है अब केवल 3882 बसें ही रह गई हैं। इन 3882 बसों में से केवल 3100 बसें ही प्रतिदिन सड़कों पर चलती हैं जबकि दिल्ली में लगभग 11,000 बसों की आवश्यकता है।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि अगले दो वर्षों में डी.टी.सी. की 100 से अधिक सामान्य बसें और 700 लो-फ्लोर बसें सड़कों से हट जायेंगी क्योंकि उनका जीवनकाल पूरा हो जायेगा। इस समय केजरीवाल सरकार के पास इन बसों के स्थान पर नई बसें लाने की कोई योजना नहीं है और इनका पूरा ध्यान 1000 बिजली की बसें खरीदने पर है जो न केवल मंहगी हैं बल्कि उनका कोई टेस्ट भी नहीं हुआ है और साथ ही यह वर्ष 2020 से पहले सड़कों पर नहीं जा सकतीं।

तिवारी ने कहा कि प्रतिदिन 700 डी.टी.सी. बसें सड़कों पर नहीं आतीं जो दिल्ली के नागरिकों की कठिनाइयों का और डी.टी.सी. की आय में हानि का सबसे बड़ा कारण है।

इतनी बड़ी संख्या में बसों का सड़कों पर सेवा के लिए न आने का कारण यह है कि डी.टी.सी. के पास इनके रख रखाव के लिए कोई आंतरिक व्यवस्था नहीं है और छोटी से छोटी मरम्मत के लिए इसे निजी सेवा प्रदायकर्ताओं से सम्पर्क करना पड़ता है। सम्भवतः विश्व में डी.टी.सी. ही एक ऐसी बस सेवा होगी जिसके पास मरम्मत के लिए कोई कार्यरत आंतरिक वर्कशाॅप नहीं है।

श्रीमती शीला दीक्षित सरकार ने बस सप्लाई करने वालों को ही ऊंची दरों पर उनके रख रखाव का भी ठेका दे दिया था जिसके कारण आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है। किन्तु यह दुख की बात है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में वर्तमान केजरीवाल सरकार ने भी बसों के रख रखाव के लिए कोई आंतरिक व्यवस्था बनाने का प्रयास नहीं किया।

तिवारी ने यह भी कहा कि जिस प्रकार केजरीवाल सरकार सामान्य सी.एन.जी. बसें खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही और निकट भविष्य में 500 बसें सड़कों से हट जायेंगी, विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 5 वर्षों में डी.टी.सी. के बेड़े में केवल 750 बसें ही रह जायेंगी।

अतः अब समय आ गया है कि अरविन्द केजरीवाल सरकार उसी 1000 बिजली की बसें खरीदने की नौटंकी करना बंद करे और इसके बदले 4000 सी.एन.जी. बसें उसी कीमत में खरीदने पर ध्यान दें। सरकार को चाहिये कि वह शीघ्रातिशीघ्र अतिरिक्त बसें लाने का प्रयास करे और साथ ही रख रखाव के लिए आंतरिक व्यवस्था भी बनाये।

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