साइलंट कैरियर्स की वजह से भी फैल रहा है कोरोना वायरस! -सिर्फ लॉकडाउन है काफी नहीं, संक्रमितों को ज्यादा से ज्यादा टेस्ट है जरूरी

नहीं दिखाई देते लक्षण, खो जाती है सूंघने की क्षमता - ईएनटी-यूके ने एक पेपर जारी कर बताया

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ज्ञानप्रकाश/भारत चौहान नई दिल्ली , कोरोनावायरस महामारी इसलिए बन गया क्योंकि यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है और इस तरह संक्रमण की पूरी चेन सी बन जाती है। कोविड-19 से पीड़ित मरीजों में सामान्य तौर से सूखी खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन ज्यादातर मरीज ऐसे भी हैं जिनमें ऐसे कोई लक्षण दिखाई तो नहीं देते लेकिन वे संक्रमित होते हैं। यही नहीं टेस्ट किए बिना यह पता नहीं लगाया जा सकता कि वे कोरोना से संक्रमित हैं या नहीं।
ऐसे हुआ खुलासा:
ईएनटी-यूके के पेपर के मुताबिक दक्षिण कोरिया, चीन और इटली में कोविड-19 के ऐसे ढेरों मरीज मिले हैं जो अचानक सूंघने की क्षमता खो चुके हैं। ये वो मरीज थे जिनमें कोरोनावायरस के सामान्य लक्षण नहीं मिले। जर्मनी में पाया गया कि हर तीन में से दो मामले ऐसे थे जिनमें यह समस्या पाई गई। दक्षिण कोरिया में 30 फीसद कोरोनावायरस के मरीजों में पाया गया कि उनकी सूंघने की क्षमता जा चुकी है। अध्ययन के हवाले से यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साईसेज (यूसीएमएस) से संबंद्ध जीटीबी अस्पताल में डिपार्टमेंट आफ फोरेंसिक के डा. एके अग्रवाल के अनुसार जिन लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते उन्हें साइलंट कैरियर्स कहा जाता है। ऐसे में अब यह बात सामने आई है कि चीन में कोरोनावायरस के कुल संक्रमित मरीजों में एक तिहाई साइलंट कैरियर्स थे। हालांकि साइलंट कैरियर्स की बात पहली बार सामने आई है, लेकिन वि स्वास्थ्य संगठन इस बात का डर जता चुका था। यही वजह है कि डब्ल्यूएचओ कोरोनावायरस प्रभावित देशों से बार-बार ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करने की अपील कर रहा है।
टेस्ट, फिर भी है कनफ्यूजन:
डॉक्टर्स समेत कई विशेषज्ञ शुरू से यह कह रहे हैं कि भारत में कोरोनावायरस के ज्यादा मामले इसलिए सामने नहीं आ रहे हैं क्योंकि टेस्ट ही ज्यादा नहीं किए जा रहे हैं। भारत में आमतौर पर उन्हीं लोगों की जांच की जा रही है, जो विदेश से वापस लौटे हों और जिन्हें खांसी, जुकाम या बुखार की शिकायत है। इसके अलावा ऐसे लोगों के संपर्क में आए लोगों की भी जांच की जा रही है। वहीं सरकार की ओर से की गई रैंडम सेंपलिंग में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन की पुष्टि नहीं पाई गई। वहीं, अब एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि कोविड-19 के कुछ मरीजों की सूंघने की क्षमता भी खो जाती है।
क्या है तीसरी स्टेज:
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार के अनुसार इस भयंकर वायरस की तीसरी स्टेज को कम्यूनिटी ट्रांसमिशन कहा जाता है। भारत में स्थिति तीसरी स्टेज तक न पहुंचे इसके लिए कई एहतियातन कदम उठाए गए हैं। देश के ज्यादा शहरों को पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से लॉकडाउन कर दिया गया है। ऐसे में भारत में कोविड-19 के साइलंट कैरियर्स का पता लगाने में ये रिपोर्ट काफी उपयोगी साबित हो सकती है.

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