पूर्ण सूर्यग्रहण रहस्य को जानने के लिए उत्सुक दिखे राजधानीवासी – आसमान में टकटकी लगाए लोगों को बादलों ने थोड़ा मायूस किया

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भारत चौहान नई दिल्ली, राजधानीवासी वलयाकार सूर्यग्रहण के रहस्य की और शक्ल की एक झलक पाने के लिए खासे उत्साहित दिखे। लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में इस खगोलीय घटना के दीदार की चाहत रखने वालों को आसमान में छाए बादलों ने थोड़ा मायूस भी किया। वलयाकार सूर्यग्रहण में सूर्य सोने की अंगूठी जैसा नजर आता है। सूर्यग्रहण सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर शुरू हुआ और दोपहर दो बजकर दो मिनट तक रहा। रविवार सुबह इसके वलयाकार चरण को देश के उत्तरी हिस्से के कुछ क्षेत्रों में देखा जा सका। दिल्ली में नेहरू तारामंडल की निदेशक एन रत्नाश्री ने कहा कि यहां बादलों के कारण सूर्यग्रहण को देखने में थोड़ी मुश्किल रही। रत्नाश्री ने कहा कि अगला पूर्ण सूर्यग्रहण दिसंबर 2020 में दक्षिण अमेरिका से देखा जा सकेगा। 2022 में भी एक सूर्यग्रहण पड़ेगा लेकिन भारत से इसे मुश्किल से ही देखा जा सकेगा।
बच्चों में ज्यादा दिखा क्रेज:
सूर्य ग्रहण का दीदार करने के लिए लोग बड़ी संख्या में अपनी छतों पर जमा हुए। हालांकि रह रह कर काले बादलों का झुंड आ जा रहा था लेकिन गिद्ध की तरह विभिन्न माध्यमों जैजे प्रोजेक्शन तकनीक, गत्ते के बीच छेत करके उसकी परछाई से आसानी देखा तो कई लोगों ने आसानी मिलने सूर्यग्रहण सोलर ग्लास की मदद से देखा। आईसी 7 के निदेशक डा. संजय चौधरी ने कहा कि नंगी आंखों से सूर्यग्रहण देखने की मनाही थी। इस वजह से लोगों ने पहले ही नेत्र विशेषज्ञों के परामर्श के बाद उसकी छवि को देखा और सुखद अनुभव लिया। लोगों की नजर जैसी ही उस पर पड़ती वे खुशी से उछल पड़ते। सूर्य ग्रहण को नग्न आंखों से थोड़े समय के लिए भी नहीं देखा जाना चाहिए और इससे आंखों की रोशनी तक जा सकती है। नेहरू पार्क में टेलीस्कोप की मदद से कुछ लोग सूर्यग्रहण को देखने में व्यस्त रहे। जिन लोगों को फोटा ग्राफी का शौक था उन लोगों ने कैमरों में स्पेशल सोलर फिल्टर लगाकर तस्वीरें खींची। सूर्य ग्रहण का चरम बिंदु पर दोपहर 12.10 मिनट से 12.11 मिनट पर रहा। वैसे इसकी शुरूआत दिल्ली में सुबह 10 बजकर 32 मिनट पर हो गई थी और खत्म 1 बजकर 34 मिनट पर हुई।
खास बातें:
सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन पड़ता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और तीनों एक सीध में होते हैं। पूर्ण या वलयाकार सूर्य ग्रहण तब पड़ता है चंद्रमा पूरी तरह सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और परिणामस्वरूप, चंद्रमा के चारों ओर सूर्य का बाहरी हिस्सा दिखता रहता है, जो एक अंगूठी का आकार ले लेता है। यह अग्नि-वलय की तरह दिखता है जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहते हैं।

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