आयुष्मान भारत योजना में शामिल सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों को अब मिलेगी स्टार रेटिंग

एनएचए ने जारी किए दिशा निर्देश, दिल्ली के अस्पताल प्रमुखों की अब योजना में शामि होने में बढ़ेगी रूचि

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ज्ञानप्रकाश नई दिल्ली, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम जय) में शामिल सरकारी और निजी, दोनों अस्पतालों को कुछ स्वास्थ्य सुविधा संकेतकों के आधार पर अब ‘स्टार रेटिंग’ मिलेगी। लंबे समय से इस महती योजना में शामिल होने वाले निजी अस्पताल राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) से यह मांग कर रहे थे। इस पहल से यह माना जा रहा है कि अन्य निजी अस्पताल भी अपने यहां पीएम जय योजना में शामिल होने के लिए रूचि लेंगे।
जरूरी दिशा निर्देश:
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल अस्पतालों पर दिशानिर्देशों के मुताबिक सूचीबद्ध अस्पतालों को छह गुणवत्ता मानदंडों पर स्टार रेटिंग देने का प्रस्ताव किया गया है। इनमें प्रभावी, समय पर, सुरक्षित, रोगी केंद्रित,सफल और उचित स्वास्थ्य सुविधा को शामिल किया गया है। ये दिशानिर्देश एनएचए ने जारी किये हैं। प्राधिकरण के संयुक्त निदेशक जे एल मीणा ने कहा योजना के तहत शामिल किये गये सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों के अस्पतालों को स्वास्थ्य सुविधा संकेतकों के एक समूह पर आधारित स्टार रेटिंग देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। दिशानिर्देशों के आधार पर प्रस्ताव को लागू किया जाएगा। अस्पतालों को पांच स्टार तक मिल सकेंगे, जो कुछ निर्धारित मानदंडों को पूरा करने पर मिलने वाले अंकों के आधार पर तय होंगे। इनमें अस्पतालों में एडवांस एवं सुपर स्पेशलाइज देखभाल, मरीजों के पहुंचने, उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने में लगने वाला समय, मरीज के इलाज से संतुष्ट होने से जुड़े अंक आदि शामिल हैं।
दिल्ली की स्थिति:
इस योजना में दिल्ली के सिर्फ सर गंगाराम अस्पताल, बीएलके हास्पिटल समेत पांच अस्पताल ही अब तक शामिल हुए हैं। अभी देश भर में आयुष्मान योजना के तहत 23 हजार से अधिक अस्पताल शामिल हैं। पांच स्टार पाने के लिये अस्पतालों को 90 प्रतिशत या इससे अधिक स्कोर करना होगा। दिशानिर्देशों मे कहा गया है कि स्टार रेटिंग की मासिक आधार पर समीक्षा की जाएगी। मीणा ने कहा कि अस्पतालों की स्टार रेटिंग आयुष्मान भारत योजना की आधिकारिक वेबसाइट और इसके मोबाइल ऐप पर प्रकाशित की जाएगी। यह योजना सितंबर 2018 में शुरू की गई थी, तब से देश में इस योजना के तहत कम से कम 1,08,99,888 लाभार्थियों ने उपचार कराया है।

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