कुत्ते से खुद ही बचना, अस्पताल नहीं बचा पाएंगे

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ज्ञानप्रकाश
नई दिल्ली , आवारा कुत्तों से सावधान हो जाएं, गलती से यदि काट लिया है तो यह तय है आपको सरकारी अस्पताल में रैबीज इंजेक्शन नहीं मिलेगा। आवारा कुत्तों से अब खुद ही बचना पड़ेगा, कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल आपको नहीं बचा पाएंगे। इस वक्त मुफ्त में लगाए जाने वाले चार सरकारी अस्पतालों में रैबीज इंजेक्शन की आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं हो पा रही है। दिल्ली सरकार के दो अस्पतालों को छोड़कर किसी भी अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं। अनुमानत: हर दिन करीब दो हजार से अधिक कुत्ता काटने के मामले आ रहे हैं।
कहां है मुफ्त इंजेक्शन की सुविधा:
सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, गुरु तेग बहादुर और लोकनायक अस्पताल में ही रैबीज के इंजेक्शन मौजूद हैं लेकिन यहां आने वालों की संख्या बेहद ज्यादा है। लोकनायक अस्पताल की बात करें तो यहां पहले एनिमल बाइट के रोजाना 100 से 150 पेशंट आते थे लेकिन जब से सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन की सप्लाई ठप्प हुई है, तब से यहां पर रोजाना औसतन 400 पेशेंट्स की संख्या दर्ज की जा रही है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से यहां इंजेक्शन्स की सप्लाई नहीं की जा रही बल्कि अस्पताल इंजेक्शन्स की प्राइवेट परचेज कर रहा है ताकि लोगों को इंजेक्शन मिलते रहें। वहीं, पूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े गुरु तेग बहादुर साहिब अस्पताल में रोजाना 500 के करीब रैबीज इंजेक्शन के लिए पेशेंट्स पहुंच रहे हैं जबकि पहले इनकी संख्या 150 से 200 आंकी जा रही थी। सबसे ज्यादा लंबी लाइनें केंद्र सरकार के सफदरजंग और आरएमएल अस्पताल में देखी जा रही हैं। ज्यादातर सरकारी अस्पतालों से पेशेंट्स को इन्हीं अस्पतालों में रैफर किया जा रहा है। सफदरजंग अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक यहां प्रतिदिन रेबीज इंजेक्शन के लिए आने वालों की संख्या 700 तक पहुंच गई है क्योंकि सभी अस्पताल यहीं पर लोगों को रैफर कर रहे हैं। आरएमएल अस्पताल में भी रोजाना 500 पेशेंट्स रेबीज के इंजेक्शन के लिए आ रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में रेबीज इंजेक्शन्स नहीं मिल पा रहा है।
तकनीकी दिक्कतें:
डीजीएचएस डा. अशोक कुमार के अनुसार इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी एक साथ इतने इंजेक्शनों का निर्माण नहीं कर पा रही है इसलिए अस्पतालों में इंजेक्शन पहुंचाने में समस्या आ रही है। हम नई कंपनी को टेंडर देने पर विचार कर रहे हैं जो पर्याप्त स्टॉक बना सके और अस्पतालों में निरंतर रूप से इंजेक्शन्स की सप्लाई कर सके। जल्द ही यह टेंडर दे दिया जाएगा।

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